चंदौली में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस कर्मियों की गिरफ्त में खड़ा एक आरोपी।

चंदौली में अवैध शराब की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगा है या तस्करों ने अपने ठिकाने और तरीके बदल लिए हैं? बिहार में शराबबंदी के बावजूद चंदौली जनपद में शराब तस्करी के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। डीडीयू जंक्शन और मुगलसराय के नगर क्षेत्र से लेकर सकलडीहा और तुलसी आश्रम तक तस्करी से जुड़ी खबरें चर्चा में रही हैं। ऐसे में हाल के दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों से शराब बरामदगी की खबरों में आए अंतर ने निगरानी और कार्रवाई की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

विगत दिनों सकलडीहा और तुलसी आश्रम क्षेत्र से शराब तस्करी की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। दूसरी ओर, डीडीयू जंक्शन और मुगलसराय के नगर क्षेत्र से पिछले कुछ दिनों में शराब बरामदगी की खबरें सामने नहीं आई हैं। इस स्थिति के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन क्षेत्रों में तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है या तस्करों ने अपना तरीका और ठिकाना बदल लिया है।

हालांकि, शराब बरामदगी की खबरें सामने नहीं आने को तस्करी बंद होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह, इससे तस्करों को किसी तरह की छूट मिलने की पुष्टि भी नहीं होती। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई के आंकड़ों की पड़ताल जरूरी है।

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई केवल बरामदगी तक सीमित है या इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क पर भी प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। डीडीयू जंक्शन, मुगलसराय नगर क्षेत्र, सकलडीहा और तुलसी आश्रम में निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू है। इसके साथ ही तस्करी के संभावित मार्गों और नेटवर्क की पहचान के लिए संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई का विवरण सामने आना जरूरी है।

शराब तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण की स्थिति स्पष्ट करने में स्थानीय पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन एजेंसियों की ओर से हाल के दिनों में की गई चेकिंग, शराब बरामदगी और तस्करी के मामलों में दर्ज कार्रवाई का ब्योरा सामने आने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई किस स्तर पर हुई है।

फिलहाल, जरूरत केवल शराब बरामदगी के मामलों पर ध्यान देने तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि तस्करी के संभावित मार्गों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की पहचान करने की भी है। संबंधित विभागों की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि चंदौली में शराब तस्करी पर वास्तव में अंकुश लगा है या तस्करों ने अपनी गतिविधियों के ठिकाने और तरीके बदल लिए हैं।

Tags: