कालवन वीरेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण के अंतिम सोमवार उमड़ा आस्था का सैलाब
कालवन के वीरेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण के अंतिम सोमवार सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। जलाभिषेक, भजन और मेले से परिसर भक्तिमय रहा।
तस्वीर में वीरेश्वर महादेव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आ रही है।
गुजराती श्रावण मास के अंतिम सोमवार को अरावली की पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध श्री वीरेश्वर महादेव मंदिर, कालवन में सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का पवित्र जल, दूध और बिल्व पत्र से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
“ॐ वीरेश्वराय नमः” के जयघोष, शिव भजनों, ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु पारंपरिक भजनों पर झूमते हुए महादेव की आराधना करते नजर आए। गुजरात के अलावा राजस्थान के नयागांव और खेरवाड़ा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे।
मंदिर के महंत रामदास महाराज अनिरुद्ध दास महाराज ने बताया कि पूरे श्रावण माह मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही तथा प्रत्येक सोमवार को मेला आयोजित होता है। अंतिम सोमवार को भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ गई। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। प्रशासन और स्वयंसेवकों ने भीड़ नियंत्रण सहित अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
मंदिर परिसर के बाहर लगे मेले में श्रद्धालुओं ने पूजा सामग्री सहित विभिन्न वस्तुओं की खरीदारी की और लोक संस्कृति का आनंद लिया।
गुप्त गंगा मईया बनी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
वीरेश्वर धाम की प्रमुख विशेषताओं में मंदिर के पीछे घने जंगल में स्थित गुप्त गंगा मईया भी शामिल है। मान्यता के अनुसार उमरा के पवित्र वृक्ष के नीचे से वर्षों से जलधारा निकल रही है। महादेव के दर्शन के बाद श्रद्धालु जंगल के रास्ते से गुप्त गंगा मईया के दर्शन करने पहुंचते हैं और पवित्र जल को माथे से लगाकर श्रद्धा प्रकट करते हैं।
अरावली की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित वीरेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक आकर्षण का भी प्रमुख केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि सच्चे मन से वीरेश्वर महादेव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।