खेरोदा: कोमल मुनि म.सा. ने बताया आत्म-शांति और कल्याण का मार्ग
चातुर्मास धर्मसभा में गुरुदेव कोमल मुनि ने मन नियंत्रण और समभाव को जीवन में अपनाने पर जोर दिया, जबकि पर्युषण पर्व को आत्म-शुद्धि का अवसर बताया।
खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते जैन मुनि।
खेरोदा में चातुर्मास के दौरान जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड़ उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि सच्ची शांति और आत्म-कल्याण बाहरी संसार में नहीं, बल्कि मनुष्य की अंतरात्मा में निहित है। उन्होंने आत्म-पहचान को जीवन के वास्तविक कल्याण का मार्ग बताते हुए कहा कि जड़ और चेतन का अनूठा संयोजन ही मानव जीवन है।
गुरुदेव कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचानता, तब तक वह अपनी शक्तियों और भौतिक साधनों का दुरुपयोग करता रहता है। पहचान के अभाव में मन, वचन और काया—ये तीनों योग संसार में भटकते रहते हैं। जैसे ही जीव आत्म-पहचान कर लेता है, वह संसार के तमाम बंधनों से मुक्त होने के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति अपने हित की बात तो करता है, लेकिन अपने वास्तविक और आत्मिक हित से पूरी तरह अनभिज्ञ है। नश्वर संसार के झूठे आकर्षणों में लिप्त होकर जीव अपने स्थायी कल्याण को भुला बैठा है। मनुष्य जीवन भर सुख और आनंद की तलाश में भटकता है, जबकि सच्चा सुख और आनंद बाहर संसार में नहीं, बल्कि अंतरात्मा की शांति में समाहित है।
कर्म सिद्धांत की व्याख्या करते हुए गुरुदेव ने कहा कि असाता वेदनीय कर्म के उदय पर घबराना और साता वेदनीय के उदय पर अहंकार या अति-उत्साह में डूब जाना अज्ञानता का लक्षण है। धर्म और आत्म-कल्याण के मार्ग में कोई भी कर्म बाधक नहीं बनता, बल्कि वास्तविक बाधा हमारा अनियंत्रित मन है। जो साधक अनुकूल और प्रतिकूल दोनों परिस्थितियों में समभाव बनाए रखता है और अपने मन पर नियंत्रण पा लेता है, उसे संसार का कोई भी संकट या विघ्न विचलित नहीं कर सकता।
अर्थोपार्जन की अंधी दौड़ पर चिंता जताते हुए पूज्य मुनि श्री ने कहा कि केवल धन कमाने की होड़ में मनुष्य ने जीवन की मर्यादाओं और धरातल को भुला दिया है, जिससे वह अनीति के मार्ग पर बढ़ रहा है। जीवन में धन से अधिक धर्म, मर्यादा और आत्म-शांति को प्राथमिकता देने पर ही वास्तविक कल्याण संभव है।
धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि म.सा. एवं नवदीक्षित अरुण मुनि ने कहा कि आत्म-शुद्धि का महापर्व पर्युषण हमारे लिए महज एक औपचारिकता या सामाजिक प्रोटोकॉल बनकर न रह जाए, बल्कि यह अंतरात्मा से जुड़ने का 'परमात्मा का कॉल' साबित होना चाहिए। उन्होंने सभी से पर्व के आध्यात्मिक मर्म को समझकर जीवन में संयम और समभाव उतारने का आह्वान किया। खेरोदा में 07-09-2026 को आयोजित इस धर्मसभा में दिए गए संदेश में आत्म-पहचान, समभाव, संयम और आत्म-शांति को जीवन के स्थायी कल्याण से जोड़ा गया।
फोटो 01 खेरोदा में प्रवचन देते हुए मुनि श्री
फोटो बुद्धि प्रकाश पाराशर खेरोदा