Kherwara: सामुदायिक वन अधिकार पट्टों पर ग्रामीणों का विरोध, निरस्तीकरण की मांग
उदयपुर के खेरवाड़ा में बिना ग्रामसभा अनुमति दोहरे वन अधिकार पट्टे जारी करने का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप निष्पक्ष जांच मांगी।
तस्वीर में ग्रामीण जन प्रतिनिधि और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते दिख रहे हैं।
खेरवाड़ा उप तहसील क्षेत्र बावलवाड़ा की ग्राम पंचायत ढीकवास, मगरा, खेड़ा जागीर, अकोट एवं हिका के ग्रामीणों ने सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इन्हें निरस्त करने की मांग की है। जनभाव अभियोग समिति के सदस्य जयदीप जैन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत तथा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि ढीकवास क्षेत्र की करीब 98.60 हेक्टेयर, अकोट की 119.45 हेक्टेयर तथा हिका की करीब 150.46 हेक्टेयर वनभूमि से संबंधित सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित भूमि के लिए वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में वन अधिकार पत्र जारी किए गए थे।
ग्रामीणों ने आवेदन में संबंधित भूमि के विभिन्न खसरा नंबरों का उल्लेख करते हुए बताया कि उक्त भूमि पर पूर्व में वर्ष 2008 एवं 2010 में वन विभाग की ओर से वन अधिकार पत्र जारी किए जा चुके हैं। ऐसे में एक ही भूमि से संबंधित दो प्रकार के अधिकार पत्र जारी किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी करने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायत, वन विभाग एवं राजस्व विभाग के स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना ही कार्रवाई करते हुए आवेदन आगे बढ़ाया गया। साथ ही वन अधिकार समिति के कुछ सदस्यों को भी पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। जयदीप जैन ने कहा कि जांच के बाद यदि प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो जारी किए गए सामुदायिक वन अधिकार पत्र निरस्त कर पात्र ग्रामीणों को एकल पट्टे वितरित किए जाएं, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को राहत मिल सके। अब ग्रामीणों की आपत्ति और प्रशासन से की गई जांच की मांग के बीच संबंधित वनभूमि के अधिकार पत्रों की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
फोटो, जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जिलाधीश को ज्ञापन देते हुए