उदयपुर के भिंडर में मौसमी बीमारियों और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में भाग लेते स्वास्थ्य अधिकारी।

उदयपुर। भिंडर ब्लॉक में मौसमी बीमारियों की रोकथाम और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) उदयपुर द्वितीय डॉ. महेंद्र सिंह राठौड़ ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) के माध्यम से आयोजित ब्लॉक स्तरीय बैठक में उन्होंने स्क्रब टाइफस और मलेरिया के प्रभावी नियंत्रण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया।

वीसी में उपस्थित समस्त चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और एएनएम को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने तथा आमजन तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डॉ. राठौड़ ने क्षेत्र में मौसमी बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए तत्परता से कार्य करने को कहा। उन्होंने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) की निरंतर निगरानी और समुचित देखभाल पर विशेष जोर दिया, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके।

डॉ. राठौड़ ने कहा कि आमजन तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना प्राथमिकता है। इसके लिए चिकित्सा तंत्र को घर-घर तक पहुंच बनाकर अपनी सेवाएं सुनिश्चित करनी होंगी। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों, सीएचओ और एलएचवी से विशेष बातचीत कर क्षेत्र से संबंधित डेटा लिया तथा आवश्यक निर्देश जारी किए।

बैठक में खंड ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन कुमार ने भी मौसमी बीमारियों पर विशेष चर्चा की और इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) को 104 एम्बुलेंस और सेतु एप्लीकेशन के माध्यम से रेफर करने के निर्देश दिए। साथ ही, समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को आउटडोर मेंटेन करने के लिए कहा।

ब्लॉक स्तरीय बैठक में खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ) डॉ. नवीन कुमार, जिले से यूवीन कॉर्डिनेटर ओमिड कुमार सिंह, जेएसआई जिला समन्वयक, डेटा एनालिटिक प्रोजेक्ट के ललित सालवी, खण्ड कार्यक्रम अधिकारी निवेदिता जोशी और डब्ल्यूएचओ से गिरीश सहित ब्लॉक के सभी चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, सीएचओ, एएनएम एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। बैठक में जारी निर्देशों के माध्यम से मौसमी बीमारियों पर नियंत्रण, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी और क्षेत्र में नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

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