उदयपुर जिले के सायरा थाना क्षेत्र के पुनावली गांव में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने लूट की नीयत से बुजुर्ग दंपती की हत्या करने के मामले में पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में मृतक दंपती का पड़ोसी कुशल पालिवाल भी शामिल है। वारदात में प्रयुक्त वाहन भी बरामद किया गया है। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक उदयपुर रेंज उदयपुर गौरव श्रीवास्तव के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक उदयपुर महोदया डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में की गई।

पुलिस के अनुसार 12-08-2026 को प्रार्थी धूलीराम पिता शंकरलाल पालिवाल, उम्र 50 वर्ष, निवासी पुनावली, पुलिस थाना सायरा, जिला उदयपुर, राज., ने रिपोर्ट पेश की थी कि उनके बड़े भाई लहरीलाल, उम्र 70 वर्ष और भाभी राधाबाई के घर पर पड़ोसियों ने बताया कि दोनों घर पर नहीं हैं और घर का गेट खुला पड़ा है। धूलीराम ने घर जाकर देखा तो वहां कोई नहीं था और गेट खुला हुआ था। उन्होंने लहरीलाल के मोबाइल नंबर 9587834066 पर संपर्क किया, जो बंद बता रहा था, जबकि राधाबाई के नंबर 7340167793 पर भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। परिवार और रिश्तेदारों से काफी तलाश तथा संपर्क के बावजूद दोनों का पता नहीं चला। इस रिपोर्ट पर एमपीआर नंबर 39/2026 दर्ज कर प्रार्थी के बयान लेखबद्ध किए गए और गुमशुदा लहरीलाल एवं राधाबाई की तलाश के लिए टीम गठित की गई।

तलाश के दौरान लहरीलाल के मकान से दुर्गंध आने पर 14-08-2026 को गुमशुदा लहरीलाल और राधाबाई के शव उनके घर के अंदर लोहे के बड़े संदूक में मिले। दोनों शव प्लास्टिक की थैलियों में कार्टून टेप से पैक कर संदूक में बिस्तरों के नीचे छिपाए गए थे। मौके पर पुलिस अधीक्षक उदयपुर पहुंचीं। एमओबी टीम, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वॉड की सहायता से घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। दोनों शवों को महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय, उदयपुर की मोर्चरी भिजवाया गया। पुलिस के अनुसार अज्ञात आरोपियों ने रात के समय हत्या कर साक्ष्य मिटाने की नीयत से शवों को पैक कर छिपाया था। मामले की संवेदनशीलता और दोहरे हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय उदयपुर मुकुल शर्मा तथा छगन पुरोहित के निर्देशन में सायरा थानाधिकारी शैतान सिंह ने टीम गठित की।

पुलिस के सामने अज्ञात आरोपियों की पहचान करने, घटना को अंजाम देने के मोटिव का पता लगाने, हत्या के घटनास्थल को सुनिश्चित करने और हत्या के बाद शवों को पैक करने के कारणों का पता लगाने की चुनौती थी। पुलिस ने 14-08-2026 को शव मिलने के बाद क्राइम सीन सुरक्षित किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल यूनिट उदयपुर, डॉग स्क्वॉड और चल मोबाइल अनुसंधान इकाई को मौके पर बुलाकर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए। पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने विशेष टीम का गठन किया। शवों को एमबीजीएच उदयपुर की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाकर अज्ञात मुल्जिमों की सरगर्मी से तलाश शुरू की गई। टीमों ने तकनीकी और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के साथ विभिन्न रूप से आसूचना का संकलन किया तथा पारंपरिक एवं नवीन अनुसंधान तकनीक का सहारा लेकर शातिर आरोपियों की पहचान कर उन तक पहुंच बनाई।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने घटनास्थल से खून के धब्बों की सफाई की और पूरी सावधानी से ग्लव्स का इस्तेमाल कर शवों को प्लास्टिक की थैलियों तथा कार्टून टेप से पैक किया। इसके बाद शवों को लोहे के बड़े संदूक में बिस्तरों के नीचे छिपा दिया गया। बुजुर्ग दंपती के चप्पल भी गायब कर दिए गए ताकि ऐसा लगे कि दोनों अपनी मर्जी से कहीं चले गए हैं। पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतकों के मोबाइल फोन साथ ले जाकर अन्य स्थान पर चालू करके फेंक दिए गए। मुख्य आरोपी और उसके साथी वारदात के बाद मौके से गायब होकर गांव के अन्य सह-अपराधियों से घटना की पल-पल की अपडेट लेते रहे और सह-अपराधियों के साथ मिलकर ग्रामीणों के बीच मृतक राधाबाई एवं लहरीलाल के हत्याकांड को लेकर न्याय की गुहार करते रहे।

पुलिस के मुताबिक घटना का मुख्य सूत्रधार आरोपी कुशल पालिवाल, निवासी पुनावली, अच्छी लाइफस्टाइल जीने और खर्चीले शौक का आदी था। उसे जानकारी थी कि उसी गांव के लहरीलाल पालिवाल के पास काफी पैसे हैं और वह लोगों को पैसे उधार भी देते हैं। यह भी जानकारी थी कि बुजुर्ग दंपती घर पर अकेले रहते हैं। इसी से उसके मन में उनके घर पर चोरी की वारदात करने का विचार आया। इसकी प्लानिंग उसने 1-1.5 साल पहले ही शुरू कर दी थी। कुछ माह पूर्व मुख्य सूत्रधार कुशल पालिवाल अपने साथी चंदन के साथ रेकी करने गांव आया था। रेकी के बाद कुशल ने अपने अन्य साथियों विकास और दिलीप चौधरी को इस बारे में बताया और उन्हें भी शामिल कर लिया। आरोपियों ने वारदात की रूपरेखा घटना से करीब एक माह पहले तैयार करनी शुरू कर दी थी।

09-08-2026 को सुबह कुशल पालिवाल अपने साथियों चंदन यादव, विकास खरोड़ और दिलीप चौधरी के साथ चंदन यादव की ग्रैंड विटारा कार, गुजरात नंबर, लेकर गोगुंदा होते हुए पानेरिया की भागल सायरा आए। वहां से कुशल और उसके साथी कुंभलगढ़ घूमने गए और वापस आकर गोगुंदा टोल के पास होटल में कमरा लेकर रुके। इसी दौरान दिन में कुशल पालिवाल ने पुनावली गांव के जीवन पालिवाल और अपने चचेरे भाई किशन पालिवाल को अपनी योजना में शामिल कर मृतक दंपती के घर और उनकी दिनचर्या की जानकारी जुटाई। इसके बाद 10-08-2026 को कुशल पालिवाल, चंदन यादव, दिलीप चौधरी और विकास खरोड़ पुनावली आए। वारदात को अंजाम देने की नीयत से कुशल और चंदन ने अपना फोन साथियों के पास गाड़ी में रख दिया और केवल वारदात के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला दूसरा फोन लेकर मृतक दंपती के घर गए, जबकि विकास और दिलीप गाड़ी लेकर आसपास घूमते रहे।

कुशल और चंदन लहरीलाल व राधाबाई के घर पहुंचे। कुशल के पड़ोसी होने के कारण राधाबाई ने दोनों को आसानी से घर में प्रवेश दे दिया और खाना खिलाया। इसके बाद दोनों सोने का नाटक कर मौके का इंतजार करने लगे, लेकिन लोगों की आवाजाही और मौका नहीं मिलने के कारण उस दिन केवल लहरीलाल के घर पर रखी हथौड़ी को कुशल ने अपने साथ छिपाकर घर से बाहर निकलते समय साथ ले लिया। कुशल और उसके साथी पुनावली के आसपास गाड़ी में घूमते रहे और रात में इधर-उधर जगह देखकर गाड़ी में ही सो गए। अगले दिन 11-08-2026 की सुबह कुशल और चंदन योजना के मुताबिक वारदात करने की नीयत से उसी हथौड़ी को पेंट में छिपाकर मृतक दंपती के घर की तरफ गए, लेकिन दरवाजा बंद होने के कारण अंदर नहीं जा सके और वापस लौट आए। इसके बाद सभी परशुराम महादेव, नाथद्वारा और उदयपुर घूमने चले गए।

इसी दिन सभी ने तय किया कि जीवन पालिवाल और किशन पालिवाल, जो पहले से रेकी करने और घर के सदस्यों की जानकारी देने में सहयोग कर रहे थे, उनकी सहायता से रात के समय मृतक दंपती के घर में इस तरह प्रवेश किया जाए कि किसी को भनक न लगे। किशन पालिवाल और जीवन पालिवाल दोनों अपनी जन्मपत्री दिखाने के बहाने मृतक दंपती के घर पहुंचे। राधाबाई ने दरवाजा खोल दिया और किशन तथा जीवन उनके साथ लहरीलाल के मकान की पहली मंजिल पर चले गए। दोनों ने योजना के तहत राधाबाई का ध्यान भटकाया और घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़वाकर ऊपर की मंजिल पर लहरीलाल के पास चले गए। मौका देखकर कुशल पालिवाल घर में घुसकर बाथरूम में छिप गया। इसके बाद उसने जीवन और किशन को मैसेज कर बताया कि वह अंदर आकर छिप गया है और दोनों बाहर चले जाएं। दोनों बाहर चले गए और रात में दंपती के सोने का इंतजार किया गया।

दंपती के सोने के बाद कुशल पालिवाल ने छिपकर मौका देखा और अपने तीनों साथियों चंदन यादव, विकास खरोड़ और दिलीप चौधरी को बुलाकर मुख्य दरवाजे से अंदर प्रवेश कराया। इसके बाद चारों ऊपर की मंजिल पर पहुंचे और कुशल पालिवाल ने सो रहे लहरीलाल के सिर पर हथौड़े से बार-बार वार कर उनकी हत्या कर दी। राधाबाई हमेशा की तरह नीचे वाले कमरे में सो रही थीं, जिसमें संदूक रखा था और वह कमरा अंदर से बंद था, इसलिए उन्हें घटना के बारे में पता नहीं चला। कुशल पालिवाल, विकास खरोड़, दिलीप चौधरी और चंदन यादव ने मिलकर घटनास्थल की सफाई की और सूरत से अपने साथ लाई प्लास्टिक की थैलियों तथा कार्टून टेप से लहरीलाल के शव को मजबूती से पैक किया। इसके बाद सभी राधाबाई के दरवाजा खोलने का इंतजार करने लगे।

इसी दौरान शक नहीं हो, इसलिए दिलीप और विकास को वहां से निकलकर गाड़ी लेकर सड़क पर घूमते रहने और इशारे का इंतजार करने को कहा गया। घर में ही रहे कुशल पालिवाल और चंदन यादव राधाबाई के उठने का इंतजार करने लगे। अलसुबह राधाबाई उठीं और नहाने जाने लगीं तो मौका देखकर चंदन ने राधाबाई का मुंह दबाया ताकि आवाज बाहर न जाए और कुशल ने उनका गला घोंटकर हत्या कर दी। राधाबाई द्वारा पहने हुए गहने और उनके पास मिली चाबी से अलमारी खोलकर कुछ अन्य जेवरात और नकदी अपने पास रख ली गई। इसके बाद राधाबाई के शव को भी प्लास्टिक की थैलियों और कार्टून टेप से पैक किया गया। दोनों शवों को लोहे के संदूक में बिस्तर हटाकर रखा गया और ऊपर फिर बिस्तर डाल दिए गए, ताकि दोनों शवों के सड़ने से आने वाली दुर्गंध कई दिनों तक घरवालों को पता न चले। आरोपियों ने पैसे, नकदी, जेवरात, दोनों मृतकों के मोबाइल फोन और वारदात में प्रयुक्त हथौड़ी तथा अन्य शेष सामान साथ लिया और घर के दरवाजे को अटका कर पैदल सड़क पर अपने साथियों के पास चले गए। सभी आरोपियों ने पुलिस और परिजनों का ध्यान भटकाने के लिए मृतकों के फोन स्विच ऑन कर हाईवे के रास्ते में फेंक दिए।

जांच में आरोपियों के कर्ज के जाल में फंसे होने की बात भी सामने आई। आरोपियों को अच्छी लाइफस्टाइल जीने का शौक था, जिसके कारण वे लोगों और बैंकों से पैसे उधार तथा लोन लेकर समय पर वापस नहीं चुका पा रहे थे। लगातार बढ़ते कर्ज और आर्थिक तंगी के कारण वे कर्ज के जाल में फंस गए थे। इसी आर्थिक दबाव और पैसों की व्यवस्था करने की मंशा से उन्होंने लूट की नीयत से बुजुर्ग दंपती की हत्या की वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें कुशल उर्फ खुशी पालिवाल पिता मांगीलाल जी, जाति ब्राह्मण, उम्र 26 वर्ष, निवासी सरकारी स्कूल के पास पुनावली, पुलिस थाना सायरा, जिला उदयपुर, राज., हाल निवासी मकान नंबर 504, 505 कृष्णा रॉ हाउस, रेलवे स्टेशन रोड सचिन, पुलिस थाना सचिन, जिला सूरत, गुजरात; चंदन यादव पिता प्रवीण यादव, जाति यादव, उम्र 27 वर्ष, निवासी कौटा दलसिंह सराय, पुलिस थाना दलसिंह सराय, जिला समस्तीपुर, बिहार, हाल निवासी बी 307 शिलालेख अपार्टमेंट, सचिन, पुलिस थाना सचिन, सूरत, गुजरात; दिलीप चौधरी पिता कनकराम चौधरी, जाति चौधरी, उम्र 30 वर्ष, निवासी ए 59 अंबिका नगर, पांडरी, सचिन, पुलिस थाना सचिन, जिला सूरत, गुजरात; किशन पिता देवीलाल पालिवाल, जाति ब्राह्मण, उम्र 21 वर्ष, निवासी ए.के. स्कूल के पास पुनावली, पुलिस थाना सायरा, जिला उदयपुर; और जीवन पिता भेरूलाल पालिवाल, जाति ब्राह्मण, उम्र 21 वर्ष, निवासी पुनावली, पुलिस थाना सायरा, जिला उदयपुर शामिल हैं।

इस कार्रवाई में सायरा थानाधिकारी पुलिस निरीक्षक शैतान सिंह, गोगुंदा थानाधिकारी पुलिस निरीक्षक प्रवीण सिंह राजपुरोहित, जिला विशेष टीम (डीएसटी) के प्रभारी पुलिस निरीक्षक भरत जी योगी, गोगुंदा विलास थानाधिकारी पुलिस निरीक्षक सुनील चारण, जिला साइबर सेल राजसमंद के उप निरीक्षक फेेलीराम, बेकरिया थानाधिकारी रामावतार मीणा, सायरा थाना के सहायक उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह, जिला साइबर टीम के प्रभारी सहायक उप निरीक्षक गजराज सिंह, सायरा थाना के सहायक उप निरीक्षक भंवर सिंह, जिला विशेष टीम के सहायक उप निरीक्षक विक्रम सिंह, जिला विशेष टीम के सहायक उप निरीक्षक अखिलेश, सायरा थाना के सहायक उप निरीक्षक गणपतनाथ, गोगुंदा विलास थाना के सहायक उप निरीक्षक धर्मवीर, बेकरिया थाना के सहायक उप निरीक्षक भरतसिंह, जिला साइबर टीम के हेड कांस्टेबल कुलदीप सिंह नंबर 2014, जिला विशेष टीम के हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह नंबर 1691, जिला विशेष टीम के हेड कांस्टेबल कमलेश नंबर 222, सायरा थाना के हेड कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह नंबर 559, सायरा थाना के हेड कांस्टेबल रामदयाल नंबर 1939, सायरा थाना के हेड कांस्टेबल चरणसिंह नंबर 745, सायरा थाना के हेड कांस्टेबल नरेंद्रसिंह नंबर 2771, सायरा थाना के हेड कांस्टेबल भूपेंद्रसिंह नंबर 559, सुखेर थाना के हेड कांस्टेबल दिनेश सिंह, सुखेर थाना के हेड कांस्टेबल श्रवण, सायरा थाना के कांस्टेबल रूपाराम नंबर 557, सायरा थाना के कांस्टेबल पुष्पराजसिंह नंबर 693, गोगुंदा थाना के कांस्टेबल वीरेंद्र नंबर 2413, सायरा थाना के कांस्टेबल नरपताराम नंबर 272, सायरा थाना के कांस्टेबल लोकेंद्र सिंह नंबर 3109, सायरा थाना के कांस्टेबल हस्तीराम नंबर 3110, जिला साइबर टीम के कांस्टेबल लोकेश नंबर 2252, सायरा थाना के कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार नंबर 2606, गोगुंदा थाना के कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह नंबर 387, गोगुंदा थाना के कांस्टेबल प्रेमप्रकाश नंबर 2209, जिला विशेष टीम के कांस्टेबल वीरेंद्र सिंह नंबर 1652, जिला विशेष टीम के कांस्टेबल सुमित नंबर 1445, जिला विशेष टीम के कांस्टेबल सुमेर सिंह नंबर 1097, सायरा थाना के कांस्टेबल निंबाराम नंबर 540 और सुखेर थाना के कांस्टेबल शंभूराम शामिल रहे।

पूरी जांच में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, पारंपरिक एवं नवीन अनुसंधान तकनीकों और आरोपियों तक पहुंचने के लिए किए गए प्रयासों का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार लूट की नीयत से की गई इस वारदात में बुजुर्ग दंपती की हत्या के बाद शवों को संदूक में छिपाकर पुलिस और परिजनों को गुमराह करने की कोशिश की गई थी। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और वारदात में प्रयुक्त वाहन की बरामदगी के साथ पुनावली में हुए दोहरे हत्याकांड की जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

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