संत-चर्या अपनाना ही सच्चा धर्म, नीयत साफ हो तो कर्म देते हैं श्रेष्ठ फल: कोमल मुनि जी
खेरोदा के चातुर्मास में कोमल मुनि जी ने संत-चर्या, शुद्ध नीयत और सद्कर्मों के महत्व के साथ महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
तस्वीर में खेरोदा कस्बे के एक हॉल में आयोजित धर्मसभा के दौरान संतगण प्रवचन देते हुए और श्रद्धालु बैठकर श्रवण करते नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे में चल रहे चातुर्मास के दौरान मेवाड़ उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि म.सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संतों की चर्चा सुनना अमृत के समान है और यह सहज भी है, किंतु स्वयं संयममय ‘संत-चर्या’ का पालन करना अत्यंत दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि सांसारिक और व्यर्थ की बातों में लोग अधिक रुचि लेते हैं, जबकि धर्मकथा के प्रति उदासीनता दिखाते हैं, जो अज्ञानता का परिचायक है।
कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि धर्मात्मा का प्रांगण ही उसका सच्चा मार्गदर्शक है और धर्म ही चौरासी लाख योनियों के आवागमन से मुक्ति दिलाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नीयत साफ हो और कर्म सही हों, तो थोड़ी सी भी धर्म-क्रिया बड़ा फल देती है, लेकिन गलत कर्मों के साथ की गई क्रियाएं व्यर्थ सिद्ध होती हैं।