उदयपुर: बकाया मानदेय को लेकर कुक कम हेल्परों ने शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
14 माह से दूध गर्म करने और 7 माह से पोषाहार का मानदेय अटका, दीपावली से पहले बकाया भुगतान व मानदेय बढ़ाने की मांग की।
उदयपुर में कुक कम हेल्परों को लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने का मामला फिर सामने आया है। दूध गर्म करने का 14 माह और पोषाहार पकाने का 7 माह का मानदेय बकाया होने से नाराज कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने 26 अक्टूबर 2026 को मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक से मुलाकात कर दीपावली से पहले समस्त बकाया भुगतान कराने और अतिरिक्त काम का अतिरिक्त भुगतान देने की मांग की।
कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति के सलाहकार नाना भगत ने बताया कि कुक कम हेल्पर पिछले दो माह से बकाया वेतन की मांग को लेकर लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए सभी कुक कम हेल्परों ने 24-25 अगस्त 2026 को विद्यालयों में पोषाहार पकाने का बहिष्कार किया था और खेरवाड़ा में पड़ाव डाला था। उस समय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने दो दिन में दूध गर्म करने का मानदेय तथा शीघ्र ही पोषाहार पकाने का मानदेय देने का आश्वासन दिया था।
आश्वासन के बावजूद भुगतान नहीं होने पर 2 सितंबर को पुनः स्मरण पत्र दिया गया, लेकिन इसके बाद भी मानदेय नहीं मिला। इसके बाद 5 अक्टूबर को जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक को ज्ञापन सौंपा गया। उस समय भी अधिकारियों ने दो दिन में वेतन भुगतान कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके 20 दिन बाद भी कुक कम हेल्परों को मानदेय नहीं मिला।
नाना भगत के अनुसार, इसी कारण 26 अक्टूबर को समिति ने पुनः मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक को पत्र देकर दीपावली से पहले सभी कुक कम हेल्परों का समस्त बकाया मानदेय दिलाने की मांग की है।
जनवादी मजदूर यूनियन के सचिव जयंतीलाल ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन हर महीने की 1 तारीख को उनके खातों में आ जाता है, लेकिन उन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों के अधीन अल्प मानदेय पर काम करने वाले कुक कम हेल्परों को समय पर भुगतान मिले, इसके लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति पिछले कई वर्षों से मानदेय बढ़ाने, सेवा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने और रोजगार सुरक्षा की मांगों को लेकर संघर्षरत है। समिति की प्रमुख मांग है कि कुक कम हेल्परों को केरल की तरह 13500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाए। सभी कुक कम हेल्परों को नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और वर्दी उपलब्ध कराई जाए तथा प्रत्येक 50 विद्यार्थियों पर एक कुक लगाया जाए। वर्तमान में सेवारत सभी कुक कम हेल्परों को स्थायी किया जाए और किसी को भी काम से नहीं हटाया जाए। इसके साथ ही सभी कुक को पेंशन और ग्रेच्युटी देने की मांग भी की जा रही है।
समिति राजस्थान के कुक कम हेल्परों को पंजाब की तरह 180 दिन का सवेतन प्रसूति अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश और 10 दिन का मेडिकल अवकाश देने की मांग कर रही है। राजस्थान पार्ट टाइम कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग रूल 2023 लागू कर कुक कम हेल्परों की नियुक्ति देने तथा 45वीं इंडियन लेबर कांफ्रेंस के प्रस्ताव को लागू कर उन्हें मजदूर मानने की मांग भी इसमें शामिल है।
समिति की अन्य मांगों में हिमाचल प्रदेश के हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार राजस्थान के कुक कम हेल्परों की छुट्टियों का वेतन नहीं काटते हुए 12 माह का वेतन देना, सभी कुक का बीमा कराना, भविष्य निधि (पीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा प्रत्येक माह नियमित रूप से वेतन देने, कुक के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने तथा बाल गोपाल योजना के अंतर्गत दूध गर्म करने का मानदेय बढ़ाने की मांग भी की जा रही है।
लंबे समय से बकाया मानदेय और सेवा सुविधाओं को लेकर संघर्ष कर रहे कुक कम हेल्परों ने एक बार फिर दीपावली से पहले भुगतान की मांग उठाई है। अब मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक को सौंपे गए पत्र के बाद बकाया मानदेय के भुगतान को लेकर समिति की मांग पर कार्रवाई का इंतजार है।