उदयपुर के सवीना में श्री सद्गुरु कबीर चरितम कथा के शुभारंभ अवसर पर सिर पर ग्रंथ उठाकर शोभायात्रा में भाग लेते श्रद्धालु।

उदयपुर में श्री सद्गुरु कबीर चरितम कथा सप्ताह का शुभारंभ भव्य ग्रंथ यात्रा के साथ हुआ। सवीना स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर से सुबह 10 बजे निकाली गई ग्रंथ यात्रा में बैंड-बाजे, घोड़ों और बग्घियों के साथ सैकड़ों भक्त शामिल हुए। भक्तजन भक्ति गीतों पर नाचते-गाते और झूमते हुए शोभायात्रा में आगे बढ़े। यात्रा के बाद सुहालका भवन में ध्वजारोहण किया गया और दीप प्रज्वलन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।

शोभायात्रा में सबसे आगे बैंड-बाजे चल रहे थे। उनके पीछे सत्यताम की पताका लिए श्वेत वस्त्र धारण किए पुरुष और लाल चुनरी पहने माथे पर कलश लिए महिलाएं चल रही थीं। इसके बाद परम पूजनीय धर्माधिकारी साहेब की रथयात्रा निकली। उनके पीछे महंत तपसी साहेब का रथ था। तीसरे रथ में सद्गुरु कबीर साहेब के चित्र को माल्यार्पण कर शामिल किया गया। भक्तजन नाचते-गाते हुए सुहालका भवन पहुंचे, जहां ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

सुहालका भवन में धर्माधिकारी साहेब के करकमलों से दीप प्रज्वलन किया गया। इसके बाद भक्तों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था रही। दोपहर 2 बजे श्री सद्गुरु कबीर चरितम कथा का शुभारंभ हुआ, जो शाम 5 बजे तक चली। पहले दिन भक्तों ने एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर सद्गुरु चरितम के प्रसंग सुनते रहे। भक्ति गीतों पर महिलाओं ने नृत्य कर आनंद लिया।

कथाकार परम पूज्य धर्माधिकारी श्री सुधाकर साहेब जी ने प्रवचन में कहा कि कलियुग में मनुष्य चारों तरफ से मोह-माया में फंसा हुआ है और विषय-भोगों में लिप्त रहने के कारण अधिक दुखी है। मनुष्य मानसिक रूप से दुखी और पीड़ित रहता है। उन्होंने कहा कि मोह रूपी अंधकार से दूर रहकर मनुष्य प्रसन्न रह सकता है। मृदु उपदेश और अमृत रूपी वाणी से कल्याण संभव है। धीरज सज्जनों को संतुष्ट करने, संतोष प्रदान करने और प्रसन्न करने के लिए है।

कार्यक्रम में महंत तपसी साहेब, भंवर लाल सुहालका, राम प्रसाद, चंदन, लोकेश चौधरी, गिरवर लाल चौधरी, सुभाष सुहालका, प्रकाश चौधरी, कैलाश प्रजापत, भगवती चौधरी, भेरुलाल माली और गजेंद्र सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे। सभी ने कथा का श्रवण किया। भव्य ग्रंथ यात्रा से शुरू हुए इस कथा सप्ताह के पहले दिन धार्मिक आयोजन, प्रवचन और भक्ति गीतों के माध्यम से सद्गुरु कबीर साहेब के विचारों को श्रद्धालुओं तक पहुंचाया गया।

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