जीवन में स्वाध्याय का महत्व कभी न भूलें, ज्ञान की पिपासा और निष्काम सेवा जरूरी: गुरुदेव कोमल मुनि
खेरोदा में गुरुदेव कोमल मुनि ने स्वाध्याय, ज्ञान की पिपासा और निष्काम सेवा का संदेश दिया, मुमुक्षु कांतिलाल गांधी सम्मानित हुए।
तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में मुमुक्षु कांतिलाल गांधी को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए संघ के पदाधिकारी और गुरु भक्त नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे के जैन स्थानक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरुदेव कोमल मुनि ने जीवन में स्वाध्याय के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में स्वाध्याय के महत्व को कभी नहीं भूलना चाहिए। ध्यान की लगन अपनी जगह आवश्यक है, किंतु स्वाध्याय की प्रमुखता हर समय और हर स्थान पर बनी रहनी चाहिए। स्वाध्याय को किसी एक स्थिति तक सीमित नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यही आत्मा के अज्ञान को दूर कर धर्म के मार्ग को आलोकित करता है।
गुरुदेव कोमल मुनि ने ज्ञान के प्रति दृष्टि को निष्पक्ष और जागृत रखने पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान के प्रति समझ होनी चाहिए, हठ या आग्रह नहीं। ज्ञान किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। इसलिए मन में ज्ञान के प्रति हमेशा पिपासा और सीखने की भूख बनी रहनी चाहिए।
सेवा धर्म के रहस्य को समझाते हुए मुनि श्री ने कहा कि सच्ची सेवा वह नहीं है जो केवल दिखाने के लिए की जाए, बल्कि वही सेवा है जो दूसरों की पीड़ा देखकर हृदय में करुणा जगाए। जो जीवों की निष्काम भाव से सेवा करता है, वही अनंतानंत महिमा और आत्म-कल्याण को प्राप्त करता है। उन्होंने भगवान महावीर के जिन शासन को साक्षात कल्पवृक्ष बताते हुए कहा कि यह शासन सत्य और अहिंसा का अनुपम और दुर्लभ मार्ग है, जो देवों को भी जीवों पर दया करना और परस्पर उपकार सिखाता है।
नश्वर शरीर के अहंकार पर प्रहार करते हुए मुनि श्री ने कहा कि इस सुंदर देह पर क्या गुमान करना? मृत्यु एक दिन राजा हो या रंक, सभी को निगल जाती है। इसलिए देह के अहंकार को त्यागकर जिन शासन की शरण में आकर आत्मा का कल्याण करना चाहिए।
आगम वाचन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने सभी को स्वाध्याय अपनाने, ज्ञान का पिपासु बनने और निष्काम सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। धर्मसभा में अध्ययनशील व सेवारत्न हर्षित मुनि ने ‘सुख विपाक’ का आगम वाचन करते हुए गुरुदेव के वचनों को आगे बढ़ाया।
इस पावन अवसर पर श्री वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा खेरोदा एवं श्री स्वाध्याय मंडल द्वारा मुमुक्षु कांतिलाल गांधी को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में खेरोदा सहित निंबाहेड़ा, चित्तौड़गढ़, सांवलिया जी, भादसोड़ा, बानसेन, फतेहनगर, मावली, सुरपुर, रामथली, वल्लभनगर, भटेवर और अमरपुरा आदि कई स्थानों से पधारकर गुरु भक्तों ने धर्म लाभ लिया।