तस्वीर में श्री हरिहर धाम बदराणा में फूलों और मालाओं से सुसज्जित भगवान श्री कृष्ण की भव्य एवं अलंकृत प्रतिमा नजर आ रही है।

श्री हरिहर धाम बदराणा में भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान श्री हरिहर की प्रतिमा का पंचगव्य, गंगाजल, यमुनाचल और दिव्य गन्धोक से महाअभिषेक किया गया। इसके बाद चांदनु लेपन और इत्र अभिषेक के साथ भगवान का भव्य एवं दिव्य श्रृंगार किया गया।

श्री हरिहर धर्म महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं बदराणा राजपरिवार के अमर सिंह झाला ने बताया कि प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी पर यह धार्मिक आयोजन किया गया। महाअभिषेक और श्रृंगार के बाद ढोल-नगाड़े, थाली, माद्ल और शंखनाद के बीच भव्य महाआरती हुई। मंदिर के बड़े मुखिया चंद्रकांत सांचीहर के निर्देशन में माधव सांचीहर ने भगवान की आरती उतारी।

जन्माष्टमी के पर्व पर इस बार रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और स्वार्थ सिद्ध योग रहा। धार्मिक दृष्टि से इन योगों को शुभ माना जाता है।

आयोजन में मंदिर के बड़े मुखिया चंद्रकांत सांचीहर, राजपरिवार के अमर सिंह झाला, तुलसीदास सांचीहर, विजय सांचीहर, विश्वजीत सिंह झाला, निखिल सांचीहर और चंदन सांचीहर सहित सैकड़ों की तादाद में भक्तजन उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्त लंबी लाइनों में खड़े होकर भगवान के दर्शन का लाभ लेते रहे।

इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान कृष्ण और हरिहर की जय-जयकारों से गूंजता रहा। महिलाएं भगवान की भक्ति में गीत गाकर नृत्य करती नजर आईं। वहीं, गांव क्षेत्र से आईं भजन मंडलियों ने अलग-अलग भजनों की प्रस्तुतियां दीं। जन्माष्टमी के अवसर पर हुए इस आयोजन में महाअभिषेक, श्रृंगार, आरती, भजन और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से श्री हरिहर धाम बदराणा में धार्मिक माहौल बना रहा।

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