तस्वीर में तीर्थनगरी ऋषभदेव के श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरजी मंदिर में फूलों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सजा हुआ भगवान श्रीकृष्ण का भव्य दरबार दिखाई दे रहा है।

ऋषभदेव। तीर्थनगरी ऋषभदेव में भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मठ-मंदिरों और पूजा स्थलों पर दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा क्षेत्र कृष्णमय नजर आया। शाम ढलते ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी और मध्यरात्रि तक भक्ति का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

तीर्थनगरी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिर को आकर्षक फूलों और मनमोहक विद्युत सज्जा से सजाया गया। विशेष रूप से तैयार कृष्ण दरबार की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। शाम से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे और भगवान के दर्शन के साथ जन्मोत्सव के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में मौजूद रहे।

रात्रि करीब 12.45 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पावन क्षण आते ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। जन्मोत्सव की घोषणा होते ही श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। पूरा मंदिर परिसर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर हो गया।

इस दौरान ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा। देवस्थान विभाग की ओर से आए बैंड-बाजे के दल ने अपने लवाजमे के साथ आरती के दौरान मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं। आरती देवस्थान विभाग के गिरीश व्यास द्वारा की गई।

जन्मोत्सव के दौरान कस्बेवासियों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक सोहर गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। ‘मीठे रस से भरियो री, राधा रानी लागे’ जैसे पारंपरिक गीतों ने वातावरण में भक्ति और उल्लास का रंग भर दिया। श्रद्धालु गीत-संगीत के बीच भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे नजर आए।

जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक व्रत रखा। भक्तों ने दिनभर उपवास रखकर भगवान की आराधना की और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव एवं आरती के बाद ही जलपान तथा प्रसाद ग्रहण किया। भगवान के जन्म के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को पारंपरिक प्रसाद वितरित किया गया।

माखन-मिश्री, पंजीरी सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों का प्रसाद भक्तों में बांटा गया। प्रसाद ग्रहण करने के लिए शाम से ही मंदिर एवं पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई।

ठाकुरजी मंदिर के पुजारी जगदीश प्रसाद व्यास, ओम प्रसाद व्यास एवं नारायण व्यास ने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान किया। जन्मोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की गई।

जन्माष्टमी के पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। बच्चे, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी कृष्ण भक्ति में लीन दिखाई दिए। भगवान के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर में घंटियों, शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और जयकारों की गूंज ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

मंदिर पुजारी व्यास ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर मंदिर में विशेष फूलों एवं आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ भव्य कृष्ण दरबार सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और जन्मोत्सव में भाग लिया।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही केशरियाजी की तीर्थनगरी ऋषभदेव देर रात तक ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंजती रही और पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।

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