उदयपुर के भींडर क्षेत्र स्थित श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ गौशाला का प्रवेश द्वार, जहां गोवंश संरक्षण को लेकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दावेदारों से गौशाला और नंदीशाला खोलने का संकल्प लेने की अपील की गई है।

कानोड़। जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच एवं वार्ड पंच के चुनावों के बीच नागेश्वर पार्श्वनाथ गौशाला, बांसड़ा भींडर के संचालक श्याम चौबीसा ने चुनाव लड़ रहे दावेदारों से अपने पंचायत क्षेत्र में गौशाला खोलने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि गांवों में असहाय, निराश्रित और तिरस्कृत गोवंश को आश्रय देने के लिए गौशालाओं की आवश्यकता है। जनप्रतिनिधि इस दिशा में पहल करें, ताकि सड़कों पर भटकने वाली गायों को सुरक्षित स्थान मिल सके।

प्राणी मित्र एवं जिला अध्यक्ष, गौशाला संघ उदयपुर श्याम चौबीसा ने बताया कि हर गांव के चौराहों पर 50 से 100 गायें मिल जाती हैं। ये गायें रात के समय सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं, जिससे आमजन दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। वहीं, भोजन की तलाश में गायें कई बार खेतों में चली जाती हैं, जिसके कारण उन्हें तिरस्कार का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जनप्रतिनिधि गौसेवा का संकल्प लेकर गौशालाएं खोलने में सहयोग करें, तो गोवंश को संरक्षण मिल सकता है।

श्याम चौबीसा ने बताया कि सरकार की योजनाओं के तहत गौशालाओं में गायों को उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों के अनुसार स्थान दिया जाता है, लेकिन नर गोवंश को रखने से लोग डरते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत समिति स्तर पर नई नंदीशाला खोलने का प्रावधान है, जिसके लिए 1.56 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इसके साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर नया गौ सदन खोलने के लिए सरकार की ओर से 1 करोड़ रुपये प्रदान किए जाते हैं।

उन्होंने सभी नगर पालिकाओं, ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों से अपने-अपने स्तर पर गौशालाएं खोलने का आह्वान किया। साथ ही ग्रामीणों से अपील की कि वे चुनाव लड़ रहे प्रतिनिधियों से गौशाला खोलने की मांग करें और जो प्रत्याशी गौशाला खोलने का संकल्प लें, उन्हें मतदान करें। उन्होंने कहा कि गोवंश का संरक्षण राष्ट्र के संरक्षण से जुड़ा है।

चौबीसा ने बताया कि आजकल कई गांवों में गौभक्त दुर्घटनाग्रस्त गायों की सेवा में जुटे हुए हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी समस्या भूमि की है। यदि गांवों के प्रबुद्धजन इन गौभक्तों को सहयोग देकर भूमि आवंटित कराने में मदद करें, तो वे स्वयं गोपालन और गौसेवा से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभा सकते हैं। ऐसे में चुनाव लड़ रहे जनप्रतिनिधियों के लिए गौशाला और नंदीशाला खोलने का संकल्प गोवंश संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन सकता है।

Tags: