माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल की तैयारियों को लेकर ग्रीन पीपल सोसायटी के पदाधिकारियों ने उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की।

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में पक्षियों की विविधता और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पहली बार दो दिवसीय माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल-2026 आयोजित किया जाएगा। 28 और 29 नवंबर को होने वाले इस महोत्सव में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, वन अधिकारी, प्रकृतिविद और पक्षी प्रेमी शामिल होंगे। आयोजन की तैयारियों को लेकर ग्रीन पीपल सोसायटी (जीपीएस), उदयपुर के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को माउंट आबू का दौरा किया और उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव के साथ आयोजन की रूपरेखा, प्रशासनिक समन्वय तथा प्रस्तावित गतिविधियों पर चर्चा की।

बैठक में सोसायटी के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राहुल भटनागर, उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह तथा इंद्रजीत माथुर ने उपखंड अधिकारी को महोत्सव की प्रस्तावित योजना की जानकारी दी। आयोजन का उद्देश्य माउंट आबू की समृद्ध पक्षी विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और विद्यार्थियों, स्थानीय नागरिकों तथा पर्यटकों में प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

महोत्सव के आयोजन स्थल को लेकर हाल ही में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की आंतरिक सुरक्षा अकादमी, माउंट आबू के कमांडेंट महेंद्र कुमार और डीआईजी भरत भूषण के साथ भी चर्चा की गई थी। इस बैठक में अकादमी का मैदान आयोजन स्थल के रूप में निर्धारित किया गया। ग्रीन पीपल सोसायटी के तत्वावधान में होने वाले इस महोत्सव को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, राजस्थान वन विभाग और सीआरपीएफ की आंतरिक सुरक्षा अकादमी का सहयोग मिलेगा।

महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों से लगभग 400 विद्यार्थियों को शामिल करने की योजना है। उनके लिए चित्रकला प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी और जागरूकता संबंधी अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बर्ड वॉक और बर्ड ट्रेल के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राकृतिक परिवेश में पक्षियों को देखने, उनकी पहचान करने और उनके व्यवहार को समझने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं तक सीमित रखने के बजाय पक्षियों के प्राकृतिक आवास, पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका और संरक्षण की आवश्यकता से भी परिचित कराना है। इसके लिए विद्यालयों में पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को दीर्घकालीन गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।

महोत्सव के दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के निदेशक गोविंद सागर भारद्वाज और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के रजत भार्गव के विशेष व्याख्यान प्रस्तावित हैं। इसके अलावा वन विभाग के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, प्रकृतिविदों और पक्षी विशेषज्ञों के बीच पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी। इसमें माउंट आबू और अरावली क्षेत्र की पक्षी विविधता, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, पर्यावरणीय चुनौतियों और प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श होगा।

माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल को क्षेत्र के प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ एवं प्रकृतिप्रेमी स्वर्गीय अनिल माथुर की स्मृति को समर्पित किया गया है। महोत्सव के समापन समारोह में ‘अनिल माथुर संरक्षण पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। अनिल माथुर वर्ष 1989 से जंगल सफारी, ट्रेकिंग और पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़े रहे थे। वह वर्ष 1990 से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के आजीवन सदस्य थे और 2010 से 2015 तक माउंट आबू के इको-सेंसिटिव जोन की निगरानी समिति के सदस्य रहे। पर्यटन विभाग ने उन्हें ‘प्रकृति मित्र’ के रूप में भी मान्यता दी थी।

अनिल माथुर ने माउंट आबू के पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन की वहन क्षमता के आकलन, कचरा प्रबंधन और स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। उनके विचारों और प्रकृति के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाना भी इस महोत्सव के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य में 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें ग्रीन मुनिया, इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल और इंडियन पिट्टा प्रमुख आकर्षण हैं। क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु, वनस्पति और भौगोलिक परिस्थितियां इसे राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान देती हैं। महोत्सव के माध्यम से यहां की पक्षी विविधता को सामने लाने के साथ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता को व्यापक स्तर पर रेखांकित करने की योजना है।

आयोजक इस महोत्सव को केवल दो दिवसीय आयोजन तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालीन संरक्षण अभियान के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसके तहत पक्षी गणना, ई-बर्ड के माध्यम से नागरिक विज्ञान को बढ़ावा देने, विद्यालयों में बर्ड क्लब स्थापित करने, पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन और स्मृति व्याख्यान जैसी गतिविधियों पर काम किया जा सकता है।

आयोजन को प्लास्टिक-मुक्त रखने और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित करने पर भी जोर रहेगा। इससे माउंट आबू को पक्षी अवलोकन और प्रकृति आधारित पर्यटन के विशिष्ट गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं, प्रकृति गाइडों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

ग्रीन पीपल सोसायटी के प्रतिनिधिमंडल और उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव के बीच हुई चर्चा को आयोजन की तैयारियों तथा प्रशासनिक समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 28 और 29 नवंबर को प्रस्तावित यह महोत्सव माउंट आबू की प्राकृतिक विरासत को सामने लाने, पक्षी विविधता के संरक्षण और नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाएगा।

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