तस्वीर में लोग बैठक कक्ष में मेज के पास बैठकर चर्चा कर रहे हैं।

उदयपुर। माउंट आबू में 28 एवं 29 नवंबर को आयोजित होने वाले दो दिवसीय बर्ड फेस्टिवल की तैयारियों को लेकर ग्रीन पीपल सोसाइटी (GPS) की तृतीय बैठक आज संपन्न हुई। बैठक में फेस्टिवल की विस्तृत रूपरेखा, आयोजन की तैयारियों, स्टॉल, प्रकाशन, ब्रांडिंग, अतिथि सत्कार और आगामी जागरूकता गतिविधियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। फेस्टिवल में पक्षी संरक्षण, जागरूकता और प्रकृति पर्यटन पर फोकस रहेगा।

बैठक में फेस्टिवल के दौरान लगने वाली विभिन्न स्टॉलों को लेकर सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। श्रीमती पुष्पा खमेसरा द्वारा पक्षियों पर आधारित दुर्लभ डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगाने पर सहमति बनी।

अध्यक्ष राहुल भटनागर ने बताया कि बैठक में फेस्टिवल के अवसर पर प्रकाशित की जाने वाली स्मारिका (Souvenir) को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्मारिका में पक्षियों, जैव विविधता, संरक्षण, प्रकृति पर्यटन एवं स्थानीय पारिस्थितिकी से जुड़े विभिन्न विषयों पर लेख शामिल किए जाएंगे। लेखों के विषय तय कर उनकी जिम्मेदारी सदस्यों को सौंपी गई।

फेस्टिवल की व्यापक पहुंच और प्रतिभागियों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पॉकेट-साइज पुस्तिका (बुकलेट) प्रकाशित करने का भी निर्णय लिया गया। इसमें माउंट आबू के प्रमुख पक्षियों, पक्षी अवलोकन स्थलों, संरक्षण संबंधी जानकारी तथा फेस्टिवल की प्रमुख गतिविधियों को संक्षिप्त एवं आकर्षक रूप में शामिल किया जाएगा।

बैठक में बर्ड फेस्टिवल की ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार सामग्री, अतिथि उपहार (हैम्पर्स), प्रकाशन सामग्री तथा आगामी जागरूकता गतिविधियों की योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। आयोजन को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए संभावित प्रायोजकों से संपर्क एवं सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने माउंट आबू की समृद्ध जैव विविधता और पक्षी संपदा को देशभर के पक्षी प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों एवं पर्यटकों तक पहुंचाने के साथ-साथ पक्षी संरक्षण के प्रति स्थानीय समुदाय में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक में आगामी 5 सितंबर को गुलाब बाग में आयोजित होने वाले ‘वल्चर डे’ कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। यह कार्यक्रम ग्रीन पीपल सोसाइटी (GPS), WWF एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व, प्राकृतिक संतुलन में उनकी भूमिका तथा उनके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति आमजन, विद्यार्थियों एवं युवाओं में जागरूकता पैदा करना है।

बैठक के अंत में सचिव सतीश शर्मा ने सदस्यों से माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल को पर्यावरण संरक्षण, पक्षी अध्ययन, प्रकृति पर्यटन और जन-जागरूकता का प्रभावी मंच बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को गति देने का संकल्प दिलवाया।

Tags: