खेरवाड़ा के किला माता मंदिर में मां सिद्धिदात्री की पूजा, महाआरती में उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु
खेरवाड़ा के किला माता मंदिर में महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना हुई। महंत भारत भूषण जोशी ने आठ सिद्धियों का महत्व बताया। रविवार रात गरबा रास के बाद महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।
खेरवाड़ा के किला माता मंदिर परिसर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित गरबा रास में डांडिया करते श्रद्धालु।
खेरवाड़ा के किला माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। नौ दिवसीय नवरात्रि के अंतिम दिन मंदिर में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। मां के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे और सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
किला माता मंदिर के महंत भारत भूषण जोशी ने बताया कि मां सिद्धिदात्री दुर्गा का नौवां स्वरूप हैं और सभी प्रकार की सिद्धियां एवं मोक्ष प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी कृपा से भक्तों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व सहित आठ सिद्धियां प्राप्त होती हैं। महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस दिन पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इस अवसर पर कन्या पूजन और हवन का भी विशेष महत्व माना जाता है।
इससे पूर्व रविवार रात्रि को किला माता मंदिर परिसर में गरबा रास का आयोजन किया गया। इसमें युवा महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गरबा की थाप पर मां दुर्गा की आराधना के साथ मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा।
गरबा रास के बाद मां दुर्गा की महाआरती की गई। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा। मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना, गरबा रास और महाआरती के साथ किला माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि महोत्सव भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।