104 वर्षों बाद जीवंत हुई जवास ठिकाने की परंपरा, नए राव ऋतुराज सिंह चौहान का सर्वसमाज ने किया सम्मान

खेरवाड़ा के जवास ठिकाने में 104 वर्षों बाद ऐतिहासिक परंपरा का पुनर्जीवन हुआ। नए राव ऋतुराज सिंह चौहान का रफ़ाक़त कमेटी सहित सर्वसमाज ने सम्मान किया।

Update: 2026-07-27 09:20 GMT

तस्वीर में खेरवाड़ा के जवास गांव में एक स्थान पर पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी पहने बैठे व्यक्तियों के साथ एकत्र लोग नजर आ रहे हैं, जिनके बीच में एक फ्रेम की हुई फोटो रखी हुई है।

खेरवाड़ा में जवास रियासत की लगभग 104 वर्षों से रुकी हुई ऐतिहासिक एवं गौरवशाली परंपरा का 22 जुलाई 2026 को विधिवत पुनर्जीवन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वर्गीय राव तखतसिंह चौहान की धर्मपत्नी रानी साहिबा दशरथ कुंवर ने सर्वसमाज की गरिमामयी उपस्थिति में राव ऋतुराज सिंह चौहान को विधिवत गोद ग्रहण किया। समारोह में यह भी घोषणा की गई कि राव ऋतुराज सिंह चौहान एवं कुंवर राजदीप सिंह चौहान जवास ठिकाने की परंपरा और चौहान वंश की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाएंगे।

ऐतिहासिक आयोजन के दौरान गांव के विभिन्न समाजों, सामाजिक संगठनों एवं गणमान्य नागरिकों ने राव ऋतुराज सिंह चौहान का सम्मान कर उन्हें शुभकामनाएं और बधाई दी। इसी क्रम में मुस्लिम समाज की ओर से रफ़ाक़त कमेटी जवास के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं युवाओं ने राव साहब का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा शगुन भेंट कर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर स्वर्गीय राव तखतसिंह चौहान का चित्र स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट कर उनके प्रति श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

रफ़ाक़त कमेटी के सदर ने राव ऋतुराज सिंह चौहान के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सफल नेतृत्व की कामना करते हुए गांव में अमन, खुशहाली, विकास और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की दुआ की। उन्होंने कहा कि जवास की पहचान सदैव आपसी प्रेम, भाईचारे और हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल रही है तथा भविष्य में भी सभी समाज मिलकर इस परंपरा को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

जवास ठिकाने की ऐतिहासिक परंपरा के पुनर्जीवन के साथ आयोजित इस सम्मान समारोह ने सामाजिक एकजुटता, पारंपरिक विरासत और सर्वसमाज की सहभागिता का संदेश दिया, जहां विभिन्न समाजों ने एक मंच पर एकत्र होकर नए राव ऋतुराज सिंह चौहान का अभिनंदन किया।

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