खेरवाड़ा में बछ बारस पर महिलाओं ने की गौमाता और बछड़े की पूजा
गौवत्स द्वादशी के मौके पर श्रद्धालुओं ने संतान के उत्तम स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु जीवन की कामना के साथ गौशाला में धार्मिक अनुष्ठान किए।
खेरवाड़ा स्थित श्री राम गौशाला में बछ बारस पर पूजा करती महिलाएं。
खेरवाड़ा। सनातन धर्म में संतान के सुख, आरोग्य और दीर्घायु की कामना के लिए रखे जाने वाले व्रतों में बछ बारस, जिसे गौवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है, का विशेष महत्व है। इस अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर गाय एवं बछड़े की पूजा-अर्चना की और अपनी संतान के सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगल कामना की।
गौवत्स द्वादशी के अवसर पर गौशाला में विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। गौशाला महाराज राजू गिरी की उपस्थिति में आयोजित पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गौमाता एवं बछड़े का पूजन किया। गौमाता को तिलक लगाकर पुष्प अर्पित किए गए और आरती कर सुख-समृद्धि एवं संतान की मंगल कामना की गई।
मान्यता है कि बछ बारस के दिन बछड़े सहित गाय की पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण का गायों और बछड़ों के प्रति विशेष स्नेह माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौमाता में अनेक देवी-देवताओं का वास माना जाता है, इसलिए इस दिन गौसेवा और गौपूजन का विशेष महत्व है।
राजस्थान की संस्कृति में बछ बारस पर्व विशेष श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। गौपूजन के साथ गौसेवा और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की सेवा एवं संरक्षण का संकल्प लिया और धर्म एवं संस्कृति से जुड़ी परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। आयोजन में महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक गाय और बछड़े का पूजन कर संतान के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।