खेरवाड़ा में नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा, गूंजा गरबा और डांडिया का संगीत
खेरवाड़ा उपखंड में नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा की गई, जबकि क्षेत्र में डांडिया और गरबा की धूम मची रही.
तस्वीर में महिलाएं और श्रद्धालु खेरवाड़ा में नवरात्र उत्सव के दौरान पारंपरिक गरबा और डांडिया नृत्य करते नजर आ रहे हैं.
खेरवाड़ा। नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने माता की आराधना की, वहीं पूरे खेरवाड़ा उपखंड क्षेत्र में डांडिया और गरबा की धूम चरम पर रही। डीजे की धुन पर युवा, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में गरबा खेलते नजर आए।
खड़कवा माता मंदिर बायडी के आचार्य प्रभा शंकर त्रिवेदी ने बताया कि भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद नाम से भी जाना जाता है, की माता होने के कारण देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। माता सिंह पर सवार होती हैं और कमल के पुष्प पर भी विराजमान रहती हैं। इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
किला माता मंदिर के महंत भारत भूषण जोशी ने बताया कि मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। उनकी ऊपर की एक भुजा में बाल कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, जबकि दूसरी भुजा में कमल का पुष्प रहता है। उनकी एक भुजा वरदमुद्रा में होती है और नीचे वाली भुजा में भी कमल का पुष्प सुशोभित होता है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इनकी उपासना से संतान सुख, मानसिक शांति, ज्ञान और यश की प्राप्ति होती है।
इधर, खेरवाड़ा उपखंड के पूरे क्षेत्र में नवरात्र के दौरान डांडिया और गरबा आयोजनों की रौनक बनी हुई है। सैकड़ों की संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे डीजे की धुन पर गरबा खेलने का आनंद ले रहे हैं। धार्मिक आस्था के साथ पारंपरिक नृत्य की खनक ने क्षेत्र में नवरात्र उत्सव का माहौल बना रखा है।