खेरवाड़ा से खुणादरी तक 22 किमी पैदल यात्रा, 300 श्रद्धालुओं ने किए आदिनाथ भगवान के दर्शन
खेरवाड़ा से खुणादरी के प्राचीन जिनालय तक 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा में करीब 300 श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान आदिनाथ के दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा के साथ 10 एवं 5 उपवास करने वाले तपस्वियों का सम्मान किया गया।
तस्वीर में, खेरवाड़ा में खुणादरी पदयात्रा एवं सम्मान समारोह-2026 के दौरान गणमान्य अतिथि एक तपस्वी को प्रशस्ति पत्र और नारियल भेंट कर सम्मानित करते हुए नजर आ रहे हैं.
खेरवाड़ा में श्री नेमीनाथ नवयुवक मंडल के तत्वावधान में बुधवार, 30 सितम्बर 2026 को प्रातः 5:30 बजे खेरवाड़ा से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित खुणादरी गांव के प्राचीन जिनालय तक पैदल यात्रा आयोजित की गई। धर्म और भक्ति से जुड़ी इस यात्रा में पुरुषों, महिलाओं एवं बच्चों सहित लगभग 300 धर्मप्रेमी बंधुओं ने सहभागिता की।
खुणादरी स्थित प्राचीन जिनालय में देवाधिदेव श्री 1008 आदिनाथ भगवान की लगभग 500 वर्ष प्राचीन अष्टधातु की प्रतिमा विराजमान है। पैदल यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने जिनालय पहुंचकर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान आदिनाथ के दर्शन किए तथा अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्यार्जन किया।
इस अवसर पर फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज, अन्तर्राष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारियों एवं स्थानीय सदस्यों ने दशलक्षण धर्म के दौरान 10 एवं 5 उपवास की कठिन तपस्या करने वाले तपस्वियों का अनुमोदन एवं सम्मान किया। तपस्वियों को फोटो फ्रेमयुक्त अनुमोदना पत्र भेंट कर उनकी तपस्या की सराहना की गई।
कार्यक्रम में फेडरेशन के परम संरक्षक एवं निवर्तमान राजस्थान प्रोविंस अध्यक्ष श्री प्रवीण शाह, महामंत्री श्री शांतिलाल पंचोली सहित फेडरेशन के स्थानीय पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। तपस्वियों के सम्मान एवं अनुमोदना के इस आयोजन से श्रद्धालुओं में उत्साह एवं प्रसन्नता का वातावरण रहा।
कार्यक्रम के दौरान खड़क क्षेत्रीय महासभा के अध्यक्ष एवं महामंत्री तथा खुणादरी ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं महामंत्री ने फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय एवं स्थानीय पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के प्रोत्साहन एवं समाजोपयोगी कार्यों की सराहना करते हुए साधुवाद एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
लगभग 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ आयोजन धर्म, तप, त्याग और सामाजिक एकता से जुड़ा रहा। तपस्वियों का सम्मान तप, त्याग और आत्मसंयम की साधना के प्रति समाज की श्रद्धा एवं अनुमोदना का प्रतीक रहा।