खेरोदा में चातुर्मास के दौरान जैन स्थानक भवन में उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि ने प्रेरणादायी उद्बोधन में संसार की वास्तविक सच्चाइयों और मानवीय कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य दूसरों के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं, वे कभी किसी की प्रगति सहन नहीं कर सकते और दूसरों को कष्ट पहुंचाते हैं। जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह स्वयं कभी सुख नहीं पा सकता।

मकड़ी का उदाहरण देते हुए कोमल मुनि ने समझाया कि जो दूसरों को फंसाने के लिए जाल बुनते हैं, वे अंततः खुद उसी में उलझ जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी की बर्बादी की कभी बददुआ नहीं मांगनी चाहिए। जीवन में आगे बढ़ना है तो अपनी मेहनत और तरक्की के बल पर बढ़ें, न कि दूसरों को नीचा दिखाकर।

समाज और धर्म के प्रति कर्तव्यों पर उन्होंने कहा कि समाज के प्रति हमेशा शुभ भावना रखनी चाहिए और सभी को मिलकर प्रभु की उपासना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश चलाने के लिए जैसे प्रधानमंत्री और संविधान आवश्यक हैं, वैसे ही जीवन को सही दिशा देने के लिए संतों के उपदेश और चातुर्मास अति आवश्यक हैं।

इस अवसर पर पूज्य हर्षित मुनि ने श्रावक के 21 गुणों की व्याख्या करते हुए कहा कि एक सच्चे श्रावक को हमेशा धर्म के प्रति दृढ़ और समर्पित रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह अधिवेशन इसी दिशा में समाज को संगठित और संस्कारित करने का अनूठा प्रयास है।

वर्द्धमान जैन श्रावक संघ अध्यक्ष सुनील कूकड़ा ने बताया कि संभागीय स्तर पर धर्म, समाज और संगठन को मजबूती देने के उद्देश्य से चंदनबाला महिला मण्डल संयुक्त मेवाड़ के पदाधिकारी और सदस्य श्रद्धा और उत्साह के साथ गुरु चरणों में उपस्थित हुए। इस पावन अवसर पर आगामी अधिवेशन के पोस्टर का भव्य विमोचन किया गया। अधिवेशन की थीम ‘नवसृजन- विकल्पों से बदलाव की ओर’ निर्धारित की गई है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और संगठन को नई दिशा देने का संकल्प लिया। खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित यह कार्यक्रम धर्म, समाज और संगठन को मजबूत करने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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