खेरोदा में कोमल मुनि बोले: निस्वार्थ प्रेम और सम्यक् ज्ञान से संभव है जीवन कल्याण
खेरोदा जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में कोमल मुनि और हर्षित मुनि ने आत्म-निरीक्षण, जिनवाणी और श्रेष्ठ चिंतन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
खेरोदा जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में कोमल मुनि और हर्षित मुनि ने आध्यात्मिक विचार साझा किए।
खेरोदा, 27 अक्टूबर 2026। मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि सच्चा प्रेम मानव जीवन के व्यावहारिक कार्यों को पूर्णता प्रदान करने के साथ आध्यात्मिक साधना को भी मजबूती देता है। हृदय में निस्वार्थ प्रेम जागृत होने पर ही प्रभु के प्रति चिंतन गहरा होता है। प्रेम की इसी शक्ति और श्रेष्ठ चिंतन के महत्व पर उन्होंने खेरोदा कस्बे के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में प्रकाश डालते हुए मानव जीवन के कल्याण का मार्ग बताया।
कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि निस्वार्थ प्रेम जीवन की हर प्रकार की व्याधि और संताप को दूर करने की सामर्थ्य रखता है। जहां प्रेम का अभाव होता है, वहां मनुष्य हर बात में अवगुण देखने लगता है, जबकि प्रेम से परिपूर्ण हृदय में गुणों की बहुतायत होती है और लोग स्वतः ही उसकी ओर आकर्षित होते हैं।
जीवन के उद्धार का मार्ग बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और उच्च चिंतन के बिना मानव जीवन का कल्याण संभव नहीं है। मनुष्य को व्यर्थ की चिंता में उलझने के बजाय श्रेष्ठ चिंतन अपनाना चाहिए, क्योंकि उच्च चिंतन से ही जीवन में आनंद और विशुद्धता के खजाने खुलते हैं। उन्होंने आत्म-निरीक्षण पर बल देते हुए कहा कि व्यक्ति ने जीवन में शुभ कर्म किए हों या अशुभ, उसे प्रत्येक स्थिति का आत्म-विश्लेषण अवश्य करना चाहिए। इस संसार में अरिहंत और सिद्ध परमात्मा ही हमारे सच्चे रक्षक हैं, क्योंकि वे राग और द्वेष पर पूर्ण विजय प्राप्त कर चुके हैं।
प्रेम और समर्पण के महत्व को स्पष्ट करते हुए कोमल मुनि ने कहा कि हृदय में प्रेम होने पर साधारण कुटिया की शीतलता भी महलों जैसा सुख प्रदान करती है और मन को अमूल्य शांति मिलती है। सच्चे प्रेम से ही सेवा-भाव और समर्पण स्वतः उत्पन्न होते हैं। उन्होंने जिनवाणी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिनवाणी अनंत ज्ञान की पावन धारा है, जो जीव को संसार-सागर से पार लगाती है और उसका हर प्रकार से कल्याण करती है। प्रत्येक मनुष्य को सम्यक् ज्ञान, दर्शन, चिंतन और प्रेम को अपने जीवन में अपनाकर मानव जन्म को सार्थक बनाना चाहिए।
धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि ने भी संबोधित किया। उन्होंने मृगापुत्र और अनाथी मुनि के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान आत्माओं का त्यागमय और वैराग्यपूर्ण जीवन सभी की आत्मा को भावित करने तथा आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
धर्मसभा में दिए गए प्रवचनों के माध्यम से कोमल मुनि म.सा. और हर्षित मुनि ने प्रेम, आत्म-निरीक्षण, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन, श्रेष्ठ चिंतन और त्याग-वैराग्य के महत्व को रेखांकित किया।