50 नवरात्रियों की तपस्या पूर्ण होने पर खेरवाड़ा शक्तिपीठ के महंत भारत भूषण का अभिनंदन हुआ।   

खेरवाड़ा। श्री रुद्राणी महाकालिका शक्तिपीठ (किले वाली माता) मंदिर में पीठाधीश्वर महंत भारत भूषण महाराज की 50 नवरात्रियों की तपस्या पूर्ण होने पर भक्तों और श्रद्धालुओं ने उनका सम्मान किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने महाराज को शाल, मैया की लाल चुनरी और उपरणा ओढ़ाकर तथा मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया। धर्म ध्वजा फहराते हुए संत सम्मान के जयकारे लगाए गए। भक्तों ने महाराज के दीर्घायु होने की कामना की।

महंत भारत भूषण महाराज विगत 50 नवरात्रियों से निराहार रहकर, मौन संकल्प के साथ, नंगे पैर और भूमि शयन करते हुए तपस्या कर रहे हैं। वे प्रतिदिन प्रातः 4 बजे जगतजननी की साधना में लीन रहते हैं। उनकी यह साधना निरंतर धार्मिक संकल्प और तपस्या के साथ जुड़ी हुई है।

महंत भारत भूषण महाराज अपनी कथाओं और प्रवचनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को धर्म, संस्कार और प्राचीन भारतीय संस्कृति के मार्ग पर चलने का संदेश देते हैं। वे प्रत्येक कथा में गौ माता की सेवा के लिए हर घर से प्रतिदिन एक रोटी निकालने का आग्रह करते हैं। इसके साथ ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पौधों की देखभाल, स्वच्छता तथा माता-पिता के सम्मान जैसे विषयों पर भी जनजागरण करते हैं।

महाराज का कहना है कि माता-पिता जीवन के सबसे बड़े हीरो हैं और मनुष्य को अपने कर्मों के अनुरूप ही फल प्राप्त होता है। अपने कथाओं और प्रवचनों के माध्यम से वे इन संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और धार्मिक कार्यों में योगदान के लिए महंत भारत भूषण महाराज को पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। बाल्यकाल से ही उनकी प्रतिभा को देखते हुए वर्ष 1985 में उन्हें शक्तिपीठ का आचार्य नियुक्त किया गया था। इसके बाद 14 जनवरी 2005 को उन्हें पीठाधीश्वर महंत की गादी सौंपी गई।

50 नवरात्रियों की तपस्या पूर्ण होने पर आयोजित सम्मान समारोह में श्रद्धालुओं ने महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक साधना के साथ धर्म, संस्कार, गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के संदेश उनके प्रवचनों का प्रमुख हिस्सा हैं।

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