खेरोदा कस्बे में चातुर्मास के पावन अवसर पर श्री वर्द्धमान जैन श्रावक संस्थान में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड़ प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि म.सा.

खेरोदा कस्बे में चल रहे चातुर्मास के दौरान मेवाड़ प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि म.सा. के पावन सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में जीवन की वास्तविक सार्थकता, समता और संतोष का संदेश दिया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरुदेव कोमल मुनि ने कहा कि मानव जीवन का असली लक्ष्य केवल धन कमाना या सांसारिक सुख-सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि जीवन और परिवार की वास्तविक सार्थकता को समझना है। मात्र धन-दौलत का संचय करना या परिवार का भरण-पोषण करना जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं हो सकता।

गुरुदेव कोमल मुनि ने मानव स्वभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब जीवन में आर्थिक अनुकूलता रहती है और परिवार में सब कुछ ठीक चलता है, तब व्यक्ति धर्म-ध्यान में रुचि दिखाता है, लेकिन बीमारी या किसी संकट के आते ही वह हिम्मत हार जाता है और धर्म से विमुख होने लगता है। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि महापुरुषों का जीवन सिखाता है कि भीषण संकट में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गजसुकुमाल मुनि के सिर पर धधकते अंगारे रखे जाने के बावजूद उन्होंने अपनी समता नहीं छोड़ी, उसी प्रकार जीवन की छोटी-मोटी प्रतिकूलताओं में भी संयम और समभाव नहीं खोना चाहिए। जो व्यक्ति केवल भोगों में लिप्त रहता है, वह जलता है, जबकि आत्मज्ञानी और सजग व्यक्ति विकट परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता। असंतोष और क्रोध की आग व्यक्ति की आंतरिक शांति छीन लेती है, जबकि संतोष, पुरुषार्थ और प्रभु भक्ति से ही जीवन में परम शांति, शीतलता एवं कार्यों में पवित्रता आती है।

धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि म.सा. ने नमि राजर्षि के वैराग्य का प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे महान पात्र हुए हैं, जिन्होंने एक कंगन की ध्वनि से प्रेरणा लेकर मिथिला जैसी समृद्ध नगरी का वैभव त्याग दिया और संयम मार्ग अंगीकार किया। उन्होंने बताया कि नमि राजर्षि के वैराग्य की परीक्षा लेने के लिए स्वयं देवराज शक्रेंद्र को ब्राह्मण का वेश धरकर धरती पर आना पड़ा था। नमि राजर्षि ने उनके हर गूढ़ प्रश्न का सटीक उत्तर देकर परीक्षा उत्तीर्ण की और संयम साधना से अपनी आत्मा का कल्याण किया।

इस अवसर पर वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा एवं मंत्री मुकेश डांगी सहित संघ के अनेक पदाधिकारी, गणमान्य श्रावक-श्राविकाएं एवं श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने संतों के मंगल प्रवचनों का श्रवण किया और जीवन में समता तथा संतोष धारण करने का संकल्प लिया। धर्मसभा में संतों के प्रवचनों के माध्यम से प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और समभाव बनाए रखने का संदेश दिया गया।

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