परस्परता, संगठन और अनुशासन से ही संघ व समाज का उत्थान संभव: कोमल मुनि
खेरोदा के जैन स्थानक भवन में धर्मसभा के दौरान मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि ने संघ उत्थान, परस्पर सहयोग और सद्भाव पर जोर दिया। हर्षित मुनि ने संगठन और अनुशासन को समाज की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।
तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा के दौरान संतगण श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हैं।
खेरोदा, 29 सितंबर। खेरोदा कस्बे के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि म.सा. के पावन सान्निध्य में संघ उत्थान, संगठन और अनुशासन विषय पर प्रेरक उद्बोधन हुआ। धर्मसभा में संघ और समाज को सशक्त बनाने के लिए परस्पर सहयोग, संगठन तथा अनुशासित जीवन शैली को आवश्यक बताया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने और संघ या संस्थाओं को सशक्त बनाने का आधार स्वयं का श्रम, पुरुषार्थ और परस्पर सहयोग है। उन्होंने कहा कि यह संघ पूर्वजों और संतों के अथक श्रम व पुरुषार्थ से सींचा गया है। हर घर जाकर स्नेह और धर्म की अलख जगाई गई है। रिश्तों के उपकारों को कभी चुकाया नहीं जा सकता।
उन्होंने ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्’ के दिव्य सूत्र को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर जीव में परमात्मा का वास है और सभी के प्रति यही समभाव रखना चाहिए। समाज में परस्पर प्रेम, आत्मीयता और सद्भाव होने पर ही संघ सुदृढ़ होता है और प्रभु का ज्ञान सार्थक सिद्ध होता है। मन-मुटाव और समझ के अभाव से विवाद पनपते हैं। जब तक भेदभाव समाप्त नहीं होंगे, तब तक तप और अनुष्ठान भी पूर्ण फलदायी नहीं हो सकते।
अध्ययनशील सेवारत्न हर्षित मुनि ने समाज और संस्थाओं की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज संगठन और अनुशासन दो प्रमुख विषय हैं, जिन पर विशेष ध्यान देने की महती आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम इन दोनों ही पैमानों पर निरंतर पिछड़ते जा रहे हैं। अलग-अलग धाराएं, बिखरी हुई सोच और व्यक्तिगत मतभेद समाज को उसी तरह कमजोर कर रहे हैं, जैसे किसी नदी से अलग होकर शाखाएं सूख जाती हैं।
हर्षित मुनि ने गुरुदेव मगन मुनिजी म.सा. की पावन सीख का स्मरण कराते हुए कहा कि गुरुदेव सदैव संगठन को सर्वोपरि मानते थे और फरमाते थे—“संगठन की वीणा बजने दो, मोहे मधुर-मधुर धुन सुनने दो।” उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक घटक को एकजुट होकर अनुशासनबद्ध जीवन शैली अपनानी चाहिए। तभी संघ और समाज का वास्तविक कल्याण संभव है।
कार्यक्रम के अंत में वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा, मंत्री मुकेश डांगी एवं संयोजक अरविंद बड़ाला ने संतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने संतों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने और संगठन को अनुशासित रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।