खेरोदा में गवरी का भव्य आगाज, कलाकारों ने सवा महीने के कठिन नियमों का लिया संकल्प
खेरोदा में मेवाड़ के प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनाट्य गवरी का विधिवत शुभारंभ हुआ। कलाकारों ने माताजी की आराधना के बाद सवा महीने तक कठिन व्रत, तप और नियमों की पालना का संकल्प लिया।
तस्वीर में खेरोदा कस्बे के संग्रामपुरा में पारंपरिक लोकनाट्य गवरी के शुभारंभ के अवसर पर पूजा-अर्चना करते हुए ग्रामीण और गवरी कलाकार नजर आ रहे हैं।
खेरोदा, 31 अगस्त 2026। मेवाड़ के प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनाट्य गवरी का खेरोदा कस्बे में विधिवत शुभारंभ हुआ। संग्रामपुरा (खेरोदा) में गवरी लेने की पारंपरिक रस्म पूरी की गई। कस्बे के बस स्टैंड स्थित महंत महेंद्र गिरी गोस्वामी ने शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना कर गवरी की शुरुआत कराई।
इस अवसर पर बोड़ी माताजी के भोपाजी भगा गमेती, गुड़लिया, दो राई सहित सभी गवरी कलाकारों ने माताजी की विशेष आराधना की और गवरी धारण की। धार्मिक अनुष्ठान के साथ कलाकारों ने सवा महीने तक चलने वाले इस लोकपर्व के दौरान कठिन व्रत, तप और कड़े नियमों की पालना करने का संकल्प लिया।
गवरी धारण करने की पारंपरिक रस्म पूरी होने के बाद ढोल, थाली और मांदल की पारंपरिक थाप के बीच कस्बे में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा का ग्रामीणों ने स्वागत किया। गवरी लेने के दौरान ग्रामीण एवं समाजजन भी उपस्थित रहे।
आगामी सवा माह तक क्षेत्र में थाली और मांदल की थाप के साथ गवरी लोकनाट्य के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इस दौरान पारंपरिक लोकनाट्य के माध्यम से गवरी की रस्म और आयोजन की परंपरा आगे बढ़ेगी।