भानुकुमार शास्त्री की जयंती पर उनके चित्र के समीप पुष्पांजलि कार्यक्रम में उपस्थित लोग।

उदयपुर में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद स्वर्गीय भानुकुमार शास्त्री की जयंती पर पुष्पांजलि और गौसेवा के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी ने कहा कि भानुकुमार शास्त्री का जीवन विचारनिष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और सार्वजनिक जीवन में प्रतिबद्धता की प्रेरक मिसाल रहा है। नई पीढ़ी को उनके विचारों और कार्यशैली से प्रेरणा लेनी चाहिए।

भानुकुमार शास्त्री स्मृति संस्थान की ओर से गुरुवार, 29 अक्टूबर को राष्ट्रभारती एकेडमी, सेक्टर-14, उदयपुर में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में धर्मनारायण जोशी मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भानुजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों की जयंती मनाने की सार्थकता उनके सिद्धांतों और विचारों को आत्मसात करने में है। उनका सार्वजनिक जीवन संगठनात्मक निष्ठा, वैचारिक स्पष्टता और समाज के प्रति दायित्वबोध की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भानुकुमार शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद परशुराम चौराहा, पानेरियों की मादड़ी स्थित अपना घर गौशाला में गौसेवा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में शास्त्री के पुत्र हृषिकेश शर्मा ने स्वागत किया। इस अवसर पर उदयपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल कोठारी, अपना घर आश्रम के अध्यक्ष गोपाल कनेरिया, विहिप के पूर्व विभाग मंत्री भंवरलाल शर्मा, पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी, भारत विकास परिषद् के संजीव भारद्वाज, आहूति सेवा संस्थान के डॉ. विक्रम मेनारिया, विप्र फाउंडेशन के सुरेश कुमार शर्मा और लज्जाशंकर नागदा ने भानुकुमार शास्त्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया और उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए।

समारोह की अध्यक्षता समाजसेवी परसराम सूयल ने की। इस दौरान पुष्पेन्द्र सिंह शक्तावत, नारायण मेघवाल, विजेश चौबीसा और कृष्णकांत जोशी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन अशोक बाबेल ने किया, जबकि अरुण त्रिवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

भानुकुमार शास्त्री की जयंती पर आयोजित पुष्पांजलि और गौसेवा कार्यक्रम के माध्यम से उनके वैचारिक योगदान, संगठन के प्रति निष्ठा और सार्वजनिक जीवन में समाज के प्रति दायित्वबोध को याद किया गया।

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