बगरू की घटना पर शैक्षिक महासंघ अध्यक्ष ने जताई चिंता, बोले- विद्यालयों को राजनीति का केंद्र न बनने दें
बगरू के विद्यालय में मारपीट और विवाद के बाद शैक्षिक महासंघ ने राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण की मांग उठाई।
तस्वीर में उदयपुर के सरस्वती शिक्षक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चन्द्र पुष्करणा और अन्य पदाधिकारी बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
बगरू (जयपुर) के एक विद्यालय में हुई मारपीट और विवाद की घटना को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चन्द्र पुष्करणा ने चिंता जताई है। उन्होंने विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने और शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के लिए भयमुक्त एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की।
उदयपुर स्थित सरस्वती शिक्षक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में पुष्करणा ने कहा कि विद्यालय शिक्षा, संस्कार और विद्यार्थियों के विकास के केंद्र हैं। इन्हें राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सिंह राठौड़, प्रदेश मंत्री रमेश चंद्र पुरोहित, संभाग संगठन मंत्री राजेंद्र सिंह सारंग देवोत, जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह झाला, जिला कोषाध्यक्ष सुनील कुमार मंडोवरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष करण सिंह, चंद्रशेखर चौधरी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
पुष्करणा ने बगरू क्षेत्र के विद्यालय में ग्रामीणों एवं राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद और मारपीट की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से शिक्षकों और विद्यार्थियों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है तथा विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में जाकर विवाद खड़ा करना, वीडियो अथवा रील बनाना और माहौल बिगाड़ना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों की शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं, शौचालय सहित अन्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय एवं संवैधानिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। विद्यालय प्रबंध समिति (SMC/SDMC), मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) तथा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के समक्ष समस्याएं रखकर संवाद के माध्यम से उनका समाधान कराया जाना चाहिए।
महासंघ ने राज्य सरकार एवं प्रशासन से विद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की। संगठन ने कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भयमुक्त एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। साथ ही शैक्षणिक एवं भौतिक समस्याओं का समाधान संवैधानिक मंचों और विभागीय अधिकारियों के साथ संवाद के माध्यम से ही किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा का वातावरण सुरक्षित एवं सुचारु बना रहे।