तमिलनाडु के डिटेंशन सेंटर से घर वापसी का सफर, 50 बांग्लादेशी नागरिक बंगाल के रास्ते भेजे गए स्वदेश|

सलेम के डिटेंशन कैंप से 50 बांग्लादेशी नागरिकों को ट्रेन से पश्चिम बंगाल भेजा गया, हरिदासपुर बॉर्डर से होगी स्वदेश वापसी।

Update: 2026-07-05 06:09 GMT

तमिलनाडु के डिटेंशन सेंटर से वतन वापसी के लिए निकलते बांग्लादेशी नागरिक।

तमिलनाडु स्थित एक विशेष डिटेंशन केंद्र में कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन रह रहे 50 बांग्लादेशी नागरिकों को उनके स्वदेश भेजने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन नागरिकों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रेल मार्ग से पश्चिम बंगाल भेजा गया है, जहाँ से उन्हें औपचारिक रूप से बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस समूह में 44 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। ये सभी नागरिक सलेम जिले के अत्तूर तालुक कार्यालय परिसर में स्थित विशेष डिटेंशन केंद्र में रखे गए थे।

निर्वासन की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत, 3 जुलाई को इन नागरिकों को तीन पुलिस वैनों के माध्यम से सड़क मार्ग से तिरुचिरापल्ली ले जाया गया। इस दौरान पूरी सुरक्षा व्यवस्था तमिलनाडु पुलिस द्वारा संभाली गई। तिरुचिरापल्ली पहुंचने के बाद, इस समूह को हावड़ा एक्सप्रेस के एक विशेष रूप से आरक्षित कोच में बैठाया गया। इस यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सलेम आर्म्ड रिजर्व के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) शक्तिवेल के नेतृत्व में 40 सदस्यीय सशस्त्र पुलिस दल को तैनात किया गया है, जो उन्हें गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए उत्तरदायी है।

अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु पुलिस की टीम इन 50 नागरिकों को पश्चिम बंगाल के हरिदासपुर लैंड बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपेगी। एक बार जब ये नागरिक बीएसएफ की हिरासत में होंगे, तो बल की ओर से आधिकारिक कागजी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही इन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिससे उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि अत्तूर में स्थित यह विशेष डिटेंशन केंद्र उन विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया है जिनके कानूनी मामले अभी लंबित हैं या जो निर्धारित न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजर रहे हैं। वर्तमान में, इस केंद्र में 130 से अधिक विदेशी नागरिक रह रहे हैं, जिनमें से कुछ के मामले अदालतों में चल रहे हैं, जबकि अन्य को जमानत पर रिहा किया गया है। यह प्रक्रिया भारतीय कानूनों के तहत विदेशी नागरिकों के प्रबंधन और उनके प्रत्यावर्तन की एक मानक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय नियमों और भारत के कानूनी ढांचे का पालन करते हुए संबंधित विदेशी नागरिकों को उनके मूल देश सुरक्षित वापस भेजना है।

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