20 साल पुराना सपना हुआ साकार! मोदी के विजन से भारत बना सेमीकंडक्टर हब की ओर अग्रसर|
प्रधानमंत्री ने बताया कि दो दशक पहले तैयार सेमीकंडक्टर योजना तत्कालीन सरकार के असहयोग के कारण पूरी नहीं हो सकी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साणंद में सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन के दौरान संबोधित करते हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का उनका विजन दो दशक पुराना है। गुजरात के साणंद में सीजी सेमी के आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) प्लांट के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को साझा किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि लगभग बीस साल पहले उन्होंने गुजरात में एक सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने की व्यापक योजना तैयार की थी। उस समय उन्होंने गांधीनगर और प्रांतिज के निकट 350 से 400 एकड़ भूमि का चयन भी कर लिया था और इस दिशा में विभिन्न कंपनियों के साथ प्रारंभिक बातचीत भी शुरू हो गई थी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों और असहयोग के कारण यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। उन्होंने उल्लेख किया कि उस दौर में जब वे इस विषय पर चर्चा करते थे, तो उन्हें उचित सहयोग मिलने के बजाय मीडिया और तत्कालीन सत्ताधारी खेमे द्वारा उपहास का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री ने तत्कालीन केंद्र सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस समय केंद्र सरकार के हाथ-पैर जैसे बेड़ियों में जकड़े हुए थे, जिससे नवाचार और औद्योगिक विकास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि जो सपना दो दशक पहले अधूरा रह गया था, वह आज पूर्ण हो रहा है और भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की यात्रा पर दृष्टि डालें तो यह प्रक्रिया लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रही है। वर्ष 2009 में तत्कालीन आईटी मंत्री ए. राजा ने स्वीकार किया था कि 2007 की सेमीकंडक्टर नीति के तहत 1.57 लाख करोड़ रुपये के 17 प्रस्ताव प्राप्त होने के बावजूद उद्योग ने अपेक्षित गति नहीं पकड़ी थी। इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए मोदी सरकार ने दिसंबर 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 को मंजूरी दी, जिसके तहत 76,000 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ कंपनियों को 50 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। वर्तमान में मिशन 2.0 के माध्यम से अनुसंधान और कार्यबल प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार कर रहे हैं।
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार का आकार जो वर्ष 2023 में 38 अरब डॉलर था, उसके वर्ष 2030 तक 100 से 110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि साणंद संयंत्र में निर्मित चिप्स का उपयोग ऑटोमोबाइल और औद्योगिक उपकरणों में होगा और इनका निर्यात जापान, अमेरिका और यूरोप के बाजारों में किया जाएगा। दिसंबर 2025 तक छह राज्यों में 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली दस सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिलना इस दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह विकास यात्रा भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार और तकनीक के क्षेत्र में एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रही है।