वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में 223 रन की नाबाद पारी खेलने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने मैच जीतने के बाद अपनी रणनीति का खुलासा किया।

गुवाहाटी के मैदान पर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक ऐतिहासिक पारी खेलकर महफिल लूट ली। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में गिल ने नाबाद 223 रनों की शानदार और रिकॉर्डतोड़ पारी खेली, जिसके दम पर भारत ने 406 रनों के विशाल लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर इतिहास रच दिया। यह गिल के वनडे करियर का दूसरा दोहरा शतक था, और इसके साथ ही वह वनडे क्रिकेट के रन चेज (लक्ष्य का पीछा करते हुए) में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं।

मैच के बाद अपनी इस ऐतिहासिक पारी और टीम की रणनीति पर खुलकर बात करते हुए कप्तान शुभमन गिल ने कई दिलचस्प खुलासे किए। उन्होंने स्वीकार किया कि स्कोरबोर्ड पर 400 से ज्यादा का लक्ष्य देखकर मानसिक दबाव तो था ही, साथ ही गुवाहाटी की चिलचिलाती धूप और उमस ने भी खिलाड़ियों को बुरी तरह परेशान किया। प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार जीतने के बाद गिल ने अपने शारीरिक संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि उनके शरीर के हर हिस्से में ऐंठन हो रही थी। उन्होंने कहा कि जब मैच में लगभग 13 ओवर ही फेंके गए थे, तब ऐसा महसूस हो रहा था कि टीम ने पहले ही 20 से 25 ओवर तक की फील्डिंग कर ली हो। उन्होंने यह भी माना कि पिच चाहे कितनी भी अच्छी क्यों न हो और मैदान का आकार कितना भी छोटा हो, 400 रनों का पीछा करना कभी भी आसान नहीं होता है। हालांकि, अंत तक क्रीज पर टिके रहकर मैच को फिनिश करने और टीम को जीत दिलाने से उन्हें बेहद खुशी मिली।

विशाल लक्ष्य के दबाव से निपटने के लिए भारतीय टीम ने एक खास और सधी हुई प्लानिंग तैयार की थी। शुभमन गिल ने खुलासा किया कि वह पूरी पारी के दौरान एकमुश्त 406 रनों के बड़े पहाड़ के बारे में सोचने के बजाय, मैच को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर खेल रहे थे। उनकी योजना यह थी कि पावरप्ले के शुरुआती ओवरों में बिना कोई विकेट गंवाए 75 से 80 रन बोर्ड पर बना लिए जाएं। टीम जानती थी कि नई गेंद से गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी होगी, बल्लेबाजी करना काफी आसान हो जाएगा। इसके अलावा, एक तरफ की बाउंड्री छोटी होने के कारण उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ उसी दिशा में रन बटोरने की रणनीति बनाई थी। गिल ने बताया कि पारी के 25 ओवर बीत जाने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि यदि टीम 200 से 210 रनों के आसपास पहुंच जाती है, तो उनकी स्थिति मजबूत होगी। लेकिन टीम ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया और वे 230-240 के करीब थे, जिससे पावरप्ले के बाद टीम पर कभी भी कोई अतिरिक्त दबाव नहीं आया।

सिर्फ अपनी बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि भारतीय कप्तान ने टीम की गेंदबाजी पर भी खुलकर अपनी बात रखी। गिल ने ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि मैच के शुरुआती ओवरों में भारतीय गेंदबाजी उम्मीद के मुताबिक बिल्कुल नहीं रही थी। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने खुलकर अपने शॉट्स खेले और शुरुआत में ऐसा लगने लगा था कि वे आसानी से 420 या 430 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर लेंगे। गिल ने कहा कि पावरप्ले में खराब गेंदबाजी के कारण विपक्षी टीम हावी हो रही थी, लेकिन पारी के अंतिम ओवरों में खेल की दिशा को एक बार फिर अपनी तरफ मोड़ लेना और रनों पर लगाम लगाना टीम के लिए एक बड़े बोनस की तरह साबित हुआ।