407 रन का लक्ष्य चेज करने के बाद भी खुश नहीं हुए गौतम गंभीर, बोले- यह क्रिकेट नहीं सिर्फ बल्लेबाजी है|
वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में 400 से अधिक रन बनने के बाद भारतीय कोच गौतम गंभीर ने सपाट पिचों पर नाराजगी जताई।
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के बाद सपाट पिचों और गेंदबाजों की स्थिति पर अपनी बात रख रहे हैं।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले में रिकॉर्ड 407 रनों के लक्ष्य को हासिल करने के बावजूद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर खुश नजर नहीं आए। गुवाहाटी की सपाट पिच और विकेटों के रुख पर गंभीर ने सख्त नाराजगी जताते हुए इसे केवल बल्लेबाजी करार दिया। उन्होंने कहा कि बल्ले और गेंद के बीच बराबरी का मुकाबला होना बेहद जरूरी है।
गंभीर ने खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा, 'अगर मुझे पूरी ईमानदारी से कहना पड़े तो मुझे लगता है कि बल्ले और गेंद के बीच थोड़ा और संतुलन होना चाहिए। आप क्रिकेट की बात करते हैं, लेकिन यह क्रिकेट नहीं, यह केवल बल्लेबाजी है।' उन्होंने गेंदबाजों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके करियर पर पड़ने वाले असर को लेकर गहरी चिंता जताई।
कोच का मानना है कि ऐसी पिचों पर 400 से अधिक रन बनना ब्रॉडकास्टर्स, रिकॉर्ड्स और दर्शकों के मनोरंजन के लिए शानदार हो सकता है, लेकिन गेंदबाजों के दृष्टिकोण से यह बेहद अन्यायपूर्ण है। उन्होंने युवा गेंदबाजों का समर्थन करते हुए कहा कि जब कोई युवा गेंदबाज ऐसी पिच पर गेंदबाजी करता है जहां विपक्षी टीम 400 रन बना दे, तो एक सच्चे क्रिकेट फैन और कोच के तौर पर उन्हें गेंदबाजों से पूरी सहानुभूति होती है। ऐसी पिचों पर गेंदबाजी करना उनके साथ नाइंसाफी है, और हमें उन्हें कुछ ऐसा देना चाहिए जिसके दम पर वे मैदान में मुकाबला कर सकें।
गेंदबाजों का बचाव करते हुए गंभीर ने कहा कि अब उनके प्रदर्शन का आकलन केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आपको गेंदबाजों के प्रति थोड़ी हमदर्दी रखनी होगी। कई बार गेंदबाजी के आंकड़े देखकर आप सख्त नहीं हो सकते क्योंकि उन्होंने उतना खराब प्रदर्शन नहीं किया होता जितने आंकड़े दिखाते हैं।'
वर्तमान दौर की परिस्थितियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैदान में पांच फील्डर अंदर रहने, दो नई गेंदों और पावर-हिटिंग के इस दौर में गेंदबाजों के पास वैसे भी विकल्प बेहद सीमित हैं। अगर सिर्फ विश्लेषण देखकर गेंदबाजों के प्रति कड़े हो जाएंगे, तो हम कभी नए गेंदबाज तैयार नहीं कर पाएंगे।