एशियाई खेल 2026: भारत की चार बेटियों ने रचा इतिहास, 4x400 मीटर रिले में जीता स्वर्ण पदक|
जापान के नागोया में एशियाई खेल 2026 की महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस में भारत की चार जुझारू एथलीटों ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
जापान के नागोया में आयोजित एशियाई खेल 2026 की महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस में स्वर्ण पदक जीतने के बाद पोडियम पर खड़ी भारतीय महिला एथलीट किरण पहल, प्राची चौधरी, एम आर पूवम्मा और विथ्या रामराज।
एशियाई खेल 2026 में जापान के नागोया में भारत की चार जुझारू और संघर्षशील बेटियों—किरण पहल, प्राची चौधरी, एम आर पूवम्मा और विथ्या रामराज—ने महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस में ऐतिहासिक जीत हासिल कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। इन चारों एथलीटों का सफर काफी संघर्षों से भरा रहा है, जो अंततः एक रिले रेस में साथ आकर भारत को एशियाई खेलों के पोडियम पर शीर्ष पर ले गया।
एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक की जीत
- जापान के नागोया में हो रहे एशियाई खेल, 2026 में भारतीय महिला एथलीटों ने 29 सितंबर, 2026 को महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस को 3:29:69 मिनट में पूरा करके शानदार जीत दर्ज की।
- हांग्जो में हुए पिछले एशियाई खेलों में चीन ने भारत को हराकर गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन इस बार भारतीय चौकड़ी ने चीन को पीछे छोड़ते हुए एशियाई खेलों में 4x400 मीटर रिले में सातवीं बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
- यह जीत भारत के लिए खेलों के अब तक के सबसे सफल दिन की एक बड़ी उपलब्धि रही, जिसमें यह भारत का एकमात्र ट्रैक-एंड-फील्ड गोल्ड मेडल भी रहा।
राष्ट्रगान के दौरान गर्व के आंसू
• जीत के बाद जब पोडियम पर किरण पहल, प्राची चौधरी, एम आर पूवम्मा और विथ्या रामराज को बुलाया गया, उस समय बारिश हो रही थी।
• भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजते वक्त इन चारों बेटियों का सिर गर्व से ऊंचा था और उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे।
चारों एथलीटों के संघर्ष और प्रेरणादायक सफर
• किरण पहल: हरियाणा के सोनीपत जिले की रहने वाली किरण के लिए दौड़ना एक समय बगावत जैसा था, क्योंकि उनके पिता को अपनी बेटी को एथलेटिक्स में आगे बढ़ाने के लिए पूरे गांव से लड़ना पड़ा था।
• प्राची चौधरी: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक किसान की बेटी प्राची के लिए यूपी पुलिस में डीएसपी बनने का सपना ही आगे बढ़ने की मुख्य प्रेरणा रहा है। नागोया जाने से पहले उन्होंने अपनी यूनिफॉर्म के लिए नाप भी दिया था।
• एम आर पूवम्मा: कर्नाटक के कोडगु जिले के गोनिकोप्पल गांव की जानी-मानी धावक पूवम्मा को डोपिंग बैन और डिप्रेशन जैसी गंभीर परेशानियों से उबरकर वापसी करनी पड़ी थी, जिसमें उनके पति और मां ने उनकी मदद की।
• विथ्या रामराज: तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी ऑटो-रिक्शा ड्राइवर की बेटी विथ्या ने रिले रेस में उतरने से पहले ही नागोया में 400 मीटर बाधा दौड़ (हर्डल्स) में 54.75 सेकंड का समय निकालकर दिग्गज पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा उन्होंने 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले में सिल्वर मेडल भी अपने नाम किया था।
बारिश और कड़े मुकाबले के बीच रोमांचक रेस
- बारिश के कारण ट्रैक पूरी तरह गीला हो चुका था और भारत के लिए यह मुकाबला बिल्कुल भी आसान नहीं था। किरण ने धीमी शुरुआत करते हुए तीसरे स्थान पर बैटन सौंपी थी।
- इसके बाद पूवम्मा ने कमान संभाली और डोप बैन व डिप्रेशन के अपने संघर्षों को याद करते हुए पिछड़ी हुई स्थिति को सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
- प्राची ने भारत को आगे करते हुए अपनी बढ़त बनाए रखी और फिर विथ्या रामराज ने अंतिम लैप की कमान संभाली।
- अंतिम चरणों में बहरीन की धावक सलवा ईद नासेर तेजी से आगे बढ़ते हुए फासला कम कर रही थीं। दबाव बढ़ने पर विथ्या ने खुद से कहा कि यह उनके सीजन की आखिरी रेस है और उन्हें अपनी पूरी ताकत लगा देनी है।
- बारिश और कम होते फासले के बावजूद विथ्या ने हार नहीं मानी और 3:29.69 के समय के साथ भारत को जीत की रेखा तक पहुँचा दिया। इस रेस में बहरीन दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर रहा।