केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव पहुंचकर वन विभाग की कार्रवाई से बेघर हुए पीड़ित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की।

मध्य प्रदेश के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। इस पूरी घटना के सामने आते ही उन्होंने मोर्चा संभालते हुए सीधे प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर मुलाकात की और उनका हाल जाना। मौके पर उन्होंने मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से फोन पर बातचीत कर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

कोसमी गांव में क्या हुआ?

मिली जानकारी के अनुसार, बुधनी के कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान वहां लंबे समय से रह रहे आदिवासी परिवारों के मकानों को तोड़ दिया गया। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई में न सिर्फ उनके आशियाने उजाड़े गए, बल्कि उनकी मक्का और तुअर की फसलें भी पूरी तरह नष्ट कर दी गईं। इसके अलावा, पीने और सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले एक पानी के कुएं को भी मिट्टी से भर दिए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस कार्रवाई के बाद से इन परिवारों के सामने रहने, खाने और पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

शिवराज सिंह चौहान का कड़ा रुख और अधिकारियों पर नाराजगी

घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव का दौरा किया। उन्होंने वहां पीड़ित आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि इस पूरी कार्रवाई से पहले उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों से इन गरीब आदिवासी परिवारों के घर न गिराने को लेकर बातचीत की थी। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा कार्रवाई जारी रखे जाने पर उन्होंने तीखी आपत्ति जताई।

मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों के मौजूद न होने पर भी उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि नवरात्र के पहले दिन दर्जनों गरीब परिवारों को बेघर कर दिया गया और उनकी खेतों में खड़ी फसलें भी चौपट कर दी गईं।

मुख्य सचिव और प्रदेशाध्यक्ष से फोन पर चर्चा

स्थिति का जायजा लेने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने घटनास्थल से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने संकेत दिया है कि इस पूरे मामले को लेकर वह राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे।

पीड़ितों को मिला मदद और नए मकान का भरोसा

घटना से बेघर हुए आदिवासियों को ढांढस बंधाते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन पीड़ित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। इसके साथ ही, जब तक उनके रहने के लिए स्थायी आवास की मु मु मु मु मु मु पुख्ता व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक प्रशासन और उनकी तरफ से प्रभावित परिवारों के खाने-पीने और ठहरने का पूरा इंतजाम किया जाएगा। इस पूरी घटना को लेकर प्रशासनिक अमले और वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं और स्थानीय स्तर पर यह मामला तूल पकड़ चुका है।