भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच मजबूत साझेदारी: FIPIC बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रेखांकित की भारत की विकास प्राथमिकताएं|
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में FIPIC की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की, जहां भारत और 14 प्रशांत द्वीप देशों के बीच विकास परियोजनाओं पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित FIPIC विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में 'फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन' (FIPIC) के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारत और 14 प्रशांत द्वीप देशों (PIC) के बीच स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षमता निर्माण से जुड़ी विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में समोआ, फिजी, मार्शल आइलैंड्स, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स, टवालु, टोंगा, माइक्रोनेशिया, वानुअतु और नौरू समेत कई देशों के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए।
चर्चा के दौरान नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में घोषित '12-सूत्रीय कार्य योजना' के तहत अब तक हुई प्रगति का स्वागत किया। प्रशांत द्वीप समूह के विकास में भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए यह स्पष्ट किया गया कि भारत का नजरिया हमेशा से जरूरतों पर आधारित, विकास-केंद्रित और वहां के लोगों को प्राथमिकता देने वाला रहा है। भारत 'पैसिफिक आइलैंड फोरम' की 'ब्लू पैसिफिक कॉन्टिनेंट के लिए 2050 की रणनीति' का पूरा सम्मान और समर्थन करता है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि प्रशांत द्वीप देशों के सामने आने वाली गंभीर प्राकृतिक चुनौतियों, जैसे 'अल नीनो' के बुरे प्रभावों को कम करने में भारत पूरी तरह मदद करने के लिए तैयार है। इसके अलावा अंतरिक्ष अनुसंधान, टिकाऊ तटीय और समुद्री रिसर्च के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत ने सभी सदस्य देशों को 'इंटरनेशनल सोलर अलायंस' और 'कोएलिशन फॉर डिजास्टर रिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर' से जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिससे जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को और गति मिल सके।