तस्वीर में भोपाल के हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान माइक पर भाषण देते हुए नजर आ रहे हैं।

भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और तीन बार के विधायक रामेश्वर शर्मा के गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शर्मा ने मुस्लिमों से गरबा में अपने परिवार के साथ आने की अपील की और कहा कि वे तिलक लगाकर ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करें, तभी वे पूरी तरह इसमें शामिल हो सकते हैं।

शर्मा ने कहा कि मुस्लिम गरबा में आना चाहते हैं तो आएं, लेकिन केवल मुस्लिम लड़कों के आने के बजाय उन्हें अपनी बहनों और बेटियों को भी साथ लाना चाहिए। उनके बयान में एक ऐसा वाक्य भी था जिसे धमकी के तौर पर समझा गया। इस टिप्पणी के बाद उनके बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई।

शर्मा ने यह भी कहा कि मुस्लिम गरबा में स्थायी रूप से शामिल होना चाहते हैं तो वे ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करें और माथे पर तिलक लगाएं। उन्होंने गरबा को देवी जगदंबा की धार्मिक आराधना बताते हुए कहा कि इसमें परिवार की भागीदारी होनी चाहिए और आयोजन को सम्मानजनक तरीके से किया जाना चाहिए।

बाद में शर्मा ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि गरबा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि देवी जगदंबा की पूजा और आराधना है। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम परिवार गरबा में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें अपने परिवार के साथ आना चाहिए और केवल गरबा देखने के बजाय पूजा-अर्चना में भी भाग लेना चाहिए।

शर्मा के बयान पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उनकी भाषा को आपत्तिजनक बताया। मसूद ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां धार्मिक माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के बजाय टकराव को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने शर्मा के बयान को लेकर आपत्ति जताई और ऐसी भाषा से बचने की बात कही।

मामले को लेकर जारी विवाद के बीच गरबा और नवरात्रि आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हुई है। शर्मा के बयान के बाद उनके परिवार के साथ मुस्लिमों के गरबा में शामिल होने, धार्मिक प्रतीकों और आयोजनों में भागीदारी को लेकर दिए गए वक्तव्यों ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।