बाढ़ से तबाह हुए घरों और मलबे का एरियल दृश्य नेपाल के रसुवा जिले में तबाही के संदर्भ में।

नेपाल में बुधवार सुबह आए अचानक जलसैलाब ने रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में भयंकर तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले से शुरू हुई यह बाढ़ भोटेकोशी नदी में तेजी से नीचे की ओर बढ़ी, जिसकी चपेट में कई गांव, सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं आ गईं। इस आपदा में नेपाल में 157 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चीन के तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग लापता हैं।

इस भीषण तबाही की वजह जानने के लिए विशेषज्ञ लगातार आंकलन कर रहे हैं। काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता प्रोफेसर रिजान भक्त कायस्थ ने बताया कि शुरुआती आकलन के मुताबिक बर्फ का एक बड़ा हिमस्खलन ल्हेंदे नदी में गिरा, जिससे नदी का रास्ता रुक गया और पीछे भारी मात्रा में पानी जमा हो गया। बाद में यह प्राकृतिक बांध टूट गया और पानी अचानक नीचे आ गया, जो भोटेकोशी नदी में पहुंचकर विनाशकारी बाढ़ में बदल गया।

इस घटना के पीछे भूकंप की आशंका भी जांच के दायरे में है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बत में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र गोसाईकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में था। इसके ठीक बाद लगभग 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई, इसलिए भूकंप और हिमस्खलन की कड़ियों को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है। नेपाल के हाइड्रोलॉजी और मौसम विभाग का यह भी कहना है कि ऊपरी इलाके में किसी ग्लेशियर झील के फटने की आशंका की भी जांच की जा रही है, क्योंकि रसुवा में मंगलवार और बुधवार को भारी बारिश दर्ज नहीं की गई थी।

इस क्षेत्र में इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है। जुलाई 2025 में भी इसी भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई थी, जिसे सैटलाइट तस्वीरों के आधार पर ग्लेशियर झील फटने से जोड़ा गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में कई बड़ी ग्लेशियर झीलें हैं, और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट पहले ही तिब्बत के पोइकू जलग्रहण क्षेत्र को ग्लेशियर झील फटने की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बता चुका है। इसके अलावा, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में सैटलाइट तस्वीरों के जरिए यह दावा भी किया गया है कि चीन द्वारा तिब्बत के ऊंचे इलाकों में बस्तियां बसाने और निर्माण कार्य करने से ग्लेशियर प्रभावित हुए हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि अभी बाकी है।

इस आपदा की चपेट में कई तीर्थयात्री भी फंसे हैं। इनमें से अधिकतर भारतीय नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत जा रहे थे। बुधवार सुबह ये सभी यात्री नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में सीमा पार करने की तैयारी कर रहे थे, तभी बाढ़ ने सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया और इनका संपर्क टूट गया।

नेपाल में आई इस आपदा का असर भारत तक पहुंचता दिख रहा है। तिब्बत से आने वाली भोटेकोशी नदी आगे चलकर नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे नारायणी नदी का हिस्सा बनती है और भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक कहलाती है। नेपाल का यह अतिरिक्त पानी अब बिहार के गंडक बेसिन तक पहुंच सकता है, जिसके मद्देनजर पश्चिम चंपारण के बगहा और वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास विशेष निगरानी बरती जा रही है।