तिब्बत से आई विनाशकारी बाढ़ से नेपाल में तबाही, ताश के पत्तों की तरह बहे घर और पांच जिलों में हाई अलर्ट जारी|
तिब्बत से अचानक आई बाढ़ के कारण नेपाल के 5 जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है, जहां सेना बचाव कार्य में जुटी है।
नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ के बाद बचाव कार्य और राहत अभियान चलाते हुए सुरक्षा बल।
पड़ोसी देश नेपाल से एक बेहद चिंताजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां तिब्बत से अचानक आए मौत के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण उत्तरी नेपाल के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और वहां हाहाकार मचा हुआ है। तिब्बत से आई इस अचानक बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए देश के पांच प्रमुख जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
घटना की शुरुआत बुधवार सुबह करीब नौ बजे हुई, जब तिब्बत की ओर से अचानक जबरदस्त बाढ़ का पानी भोटे कोशी नदी में आ गया। यह सैलाब तेजी से आगे बढ़ते हुए त्रिशूली नदी के रास्ते नुवाकोट की तरफ बढ़ा। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तरी रसुवा जिले के तिमुरे बाजार, तिमुरे कस्टम ऑफिस और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भारी नुकसान दर्ज किया गया है। उफनते पानी के तेज बहाव के आगे कई कच्चे और पक्के मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए और बह गए। इस तबाही के डरावने दृश्य और वीडियो भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखकर हर कोई सहम उठा है।
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल नुकसान का जायजा लेने में जुटे हुए हैं। हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का प्रारंभिक तौर पर यह मानना है कि पानी का यह अचानक और खतरनाक सैलाब किसी स्थानीय बारिश के कारण नहीं आया है, बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर झील के फटने के कारण उत्पन्न हुआ है। इस घटना के वास्तविक स्रोत और कारणों का सटीक पता लगाने के लिए मौसम विज्ञान विभाग स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के साथ मिलकर चीनी अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए है और सैटेलाइट डेटा की गहनता से जांच की जा रही है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह के निर्देशों पर नेपाली सेना ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। उफनते पानी के बीच और बाढ़ की चपेट में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हेलीकॉप्टर्स की मदद ली जा रही है और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों के नदी के किनारे बसे निचले इलाकों के लिए सख्त हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी की है। मौसम और जल स्तर के पूर्वानुमान के मुताबिक, पानी का यह तेज बहाव शाम तक मुग्लिंग में मार्श्यांगडी नदी के संगम तक पहुंच सकता है। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में रह रहे आम नागरिकों से अपील की है कि वे तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करें और प्रशासन द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें, ताकि जान-माल के बड़े नुकसान को टाला जा सके।