दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद महाराष्ट्र में एक व्यक्ति बर्तन से दूध उड़ेल रहा है।

महाराष्ट्र में दूध की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम जनता के घरेलू बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना तय हो गया है। राज्य में गाय और भैंस दोनों ही प्रकार के दूध के दामों में यह संशोधन किया गया है। 'मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन' की ओर से लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद, दूध की नई और बढ़ी हुई दरें आगामी मंगलवार यानी 11 अगस्त से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएंगी। इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर महाराष्ट्र के करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि डेयरी संचालक लगातार बढ़ती लागत का हवाला देते हुए दाम बढ़ाने पर विवश हैं। हालांकि यह फैसला दूध उत्पादकों और प्रोसेसर्स के वित्तीय हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। दूध के अलावा दही, छाछ और अन्य प्रमुख डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी लगभग दस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस बीच, संसद के पिछले सत्र के दौरान केंद्रीय स्तर पर भी दूध की कीमतों और उसके नियंत्रण को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई थी। सरकार ने लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी थी कि वर्तमान समय में दूध के लिए कोई भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सदन को बताया था कि देश में दूध की कीमतें पूरी तरह से सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा बाजार की मांग और आपूर्ति की स्थितियों के आधार पर तय की जाती हैं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करने, दूध की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने, उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करने तथा देश भर में दूध की गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों पर लगातार काम कर रही है।

महाराष्ट्र के स्थानीय स्तर पर बात करें तो दूध की नई दरों के तहत गाय का दूध अब 60 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि भैंस के दूध की कीमत 76 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 78 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इन संशोधित दरों को 11 अगस्त से लागू किया जाना तय किया गया है। कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण दूध की खरीद लागत में वृद्धि, परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन के दाम बढ़ना और पैकेजिंग सामग्री की लागत में आया उछाल बताया जा रहा है। दूध के अतिरिक्त घी, पनीर, दही और छाछ जैसे अन्य लोकप्रिय डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी दस प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिली है, जिससे आम आदमी की रसोई का खर्च और अधिक बढ़ गया है।

राज्य में डेयरी और दूध उत्पादन के क्षेत्र को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों पर नजर डालें तो, अधिक से अधिक दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र के दायरे में लाने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक देश भर में गांव के स्तर पर कुल 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि इसके साथ ही 31,150 पुरानी समितियों को और अधिक मजबूत बनाया गया है। इसके अलावा, प्रतिदिन 168 लाख लीटर दूध की चिलिंग क्षमता का विकास किया गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच 76,748 गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। सरकार ने कुल 418 लाख लीटर प्रतिदिन की दूध प्रसंस्करण और मूल्य-वर्धन क्षमता वाली विभिन्न परियोजनाओं को भी अपनी आधिकारिक मंजूरी प्रदान की है, ताकि देश के डेयरी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

राष्ट्रीय स्तर पर भारत के दुग्ध उत्पादन की प्रगति की बात करें तो देश ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 248 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) दूध का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। यदि इसकी तुलना एक दशक पहले यानी 2014-15 से की जाए, तो उस समय देश का कुल दूध उत्पादन मात्र 146 मिलियन मीट्रिक टन था, जिसका अर्थ है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के दुग्ध उत्पादन में लगभग 69 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने इस शानदार वृद्धि का पूरा श्रेय पशुओं की नस्ल में सुधार, आनुवंशिक विकास, मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान अभियानों, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के उपयोग और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को दिया है। सरकार के अनुसार देश भर में अब तक 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं, जिससे इस सेवा का कवरेज 20 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 42 प्रतिशत तक पहुंच गया है और इसके परिणामस्वरूप देश की कुल दूध उत्पादन क्षमता में 67 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है।

महाराष्ट्र के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी दूध की कीमतों में हो रही वृद्धि को लेकर जनता में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी दूध के बढ़े हुए दामों के कारण आम नागरिकों और उपभोक्ताओं में गहरी चिंता व्याप्त है, जिसके चलते विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कृष्णा डिस्ट्रिक्ट मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन द्वारा संचालित होने वाली प्रसिद्ध 'विजया डेयरी' ने 10 अगस्त से दूध की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की आधिकारिक घोषणा की थी। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद वहां एक लीटर फुल-क्रीम दूध की कीमत बढ़कर 80 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 78 रुपये थी। पिछले चार महीनों के भीतर विजया डेयरी और अन्य निजी कंपनियों समेत कई प्रमुख डेयरी ब्रांड्स द्वारा दूध के दामों में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। कीमतों में हो रही इस बार-बार की वृद्धि से उन मध्यम और गरीब वर्गीय परिवारों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं जिनके लिए दूध बच्चों के पोषण और दैनिक जीवन की एक बेहद अनिवार्य वस्तु है। इसी के विरोध में विभिन्न ग्राहक संगठनों और वामपंथी दलों ने कीमतों में हो रहे लगातार बदलावों पर कड़े सवाल उठाए हैं और सरकार से मांग की है कि दूध के दाम जनता के लिए किफायती बनाए रखने के वास्ते तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसी क्रम में शनिवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के कार्यकर्ताओं ने विजयवाड़ा के प्रमुख लेनिन सेंटर में स्थित विजया डेयरी के एक मुख्य सेल्स पॉइंट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सीपीएम कार्यकर्ताओं ने मूल्य वृद्धि के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार से मांग की कि तुरंत प्रभाव से इन नई बढ़ी हुई कीमतों को वापस लिया जाए। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं और बच्चों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बढ़ती महंगाई ने आम आदमी के जनजीवन को किस प्रकार बुरी तरह से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।