होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई फीस नीति से बढ़ी टेंशन, वैश्विक तेल-गैस सप्लाई पर मंडराया संकट|

ईरान की शुल्क वसूलने की योजना से दुनिया के 25% तेल व्यापार पर खतरा, जानें भारत और अंतरराष्ट्रीय कानून का क्या है इस पर पक्ष।

Update: 2026-07-06 04:19 GMT

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता एक तेल टैंकर, यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

होर्मुज स्ट्रेट के सामरिक महत्व को देखते हुए ईरान की ओर से जहाजों पर शुल्क वसूलने की योजना ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ईरान की यह मंशा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है। ईरान के इस कदम से न केवल खाड़ी देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है, बल्कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के प्रति भी एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

ईरान ने चीन में अपने राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फजली के माध्यम से स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को शुल्क देना होगा। हालाँकि, ईरान का कहना है कि वह अपने मित्र राष्ट्रों, जैसे कि चीन, को इसमें विशेष रियायत दे सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका के साथ बातचीत की शुरुआत में ईरान ने 60 दिनों तक कोई शुल्क न लेने की बात कही थी, लेकिन अब उसका रुख इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में झुकता दिख रहा है।

इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के अनुसार, विश्व का लगभग 25% तेल और 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसी अर्थव्यवस्थाएं पूरी तरह से अपनी गैस आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। यदि ईरान यहाँ शुल्क वसूलने की अपनी नीति को लागू करता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका सीधा और नकारात्मक असर पड़ना तय है। ऊर्जा की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

समुद्री कानूनों के जानकारों और इतिहास पर गौर करें तो 1609 में डच विधिवेत्ता ह्यूगो ग्रोटियस द्वारा प्रतिपादित 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' या समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता, आज के वैश्विक व्यापार का आधार है। भारत का भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यही रुख रहा है कि दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्ग सभी के लिए मुक्त होने चाहिए। भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट की निर्बाध उपलब्धता इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है। किसी एक देश का वर्चस्व वैश्विक स्थिरता के लिए हानिकारक हो सकता है।

ईरान के इस कदम से खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने का खतरा है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तल्खी बनी हुई है, और होर्मुज स्ट्रेट पर दावा करने का ईरान का यह प्रयास उस तल्खी को और गहरा कर सकता है। वैश्विक शांति के लिए यह अनिवार्य है कि ऊर्जा आपूर्ति का यह मुख्य मार्ग किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या शुल्क से मुक्त रहे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाएगा या फिर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट खड़ा होगा।

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