प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की महान हस्तियां महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री नई दिल्ली में जयंती के अवसर पर।

आज यानी 2 अक्टूबर, 2026 को देश भर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जा रही है। इस विशेष अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह-सुबह ही दोनों महान विभूतियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री का हर कदम और विचार बापू के आदर्शों से प्रेरित नजर आता है, और इसी कड़ी में उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दोनों महापुरुषों को याद करते हुए अलग-अलग संदेश साझा किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के पावन अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विशेष सुभाषितानि शेयर किया। उन्होंने लिखा कि पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा का ऐसा प्रकाशस्तंभ है, जो हर युग में मानवता का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मैत्री और करुणा का भाव रखता है, जो ममता और अहंकार से रहित है, सुख-दुख में समभाव रखता है और क्षमाशील है, वही श्रेष्ठ साधक है।

एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी के सम्मान में एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह राजघाट स्थित बापू की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि बापू का कालजयी संदेश हमें एक बेहतर समाज और विकसित भारत की ओर निरंतर प्रेरित करता रहे। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में बापू के जीवन के मुख्य मूल्यों जैसे अहिंसा, आस्था, साहस, सेवा और सत्य को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

महात्मा गांधी के ऐतिहासिक योगदान को याद करें तो उन्होंने ब्रिटिश गुलामी से देश को मुक्ति दिलाने के लिए तीन बड़े महत्वपूर्ण आंदोलन चलाए थे, जिनमें असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन शामिल थे। इन तीनों प्रमुख आंदोलनों और उस समय की बदलती वैश्विक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप ही भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी और अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा था।

महात्मा गांधी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर भी उन्हें गहरी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश साझा करते हुए लिखा कि लाल बहादुर शास्त्री जी को शत-शत नमन, जिनकी सादगी और देश के प्रति समर्पण आज भी देशवासियों के लिए बेहद प्रेरणादायक है। इस वीडियो में शास्त्री जी के अमर नारे 'जय जवान जय किसान' का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसने देश के जवानों और किसानों में नई ऊर्जा का संचार किया था।

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन मुगलसराय में हुआ था। वह वर्ष 1964 से 1966 तक देश के प्रधानमंत्री के पद पर रहे। अपने तीस से अधिक वर्षों के लंबे सार्वजनिक जीवन और समर्पित सेवा के दौरान, शास्त्री जी ने अपनी उदात्त निष्ठा और अद्भुत कार्यक्षमता से लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई। वह एक विनम्र, दृढ़, सहिष्णु और जबर्दस्त आंतरिक शक्ति वाले ऐसे नेता के रूप में उभरे जिन्होंने आम जनता की भावनाओं को गहराई से समझा।

शास्त्री जी एक दूरदर्शी राजनेता थे जो देश को प्रगति के पथ पर आगे लेकर आए। वह महात्मा गांधी की राजनीतिक शिक्षाओं से अत्यंत प्रभावित थे और अपने गुरु महात्मा गांधी के ही लहजे में उन्होंने एक बार कहा था कि 'मेहनत प्रार्थना करने के समान है।' महात्मा गांधी के समान विचार रखने वाले लाल बहादुर शास्त्री भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ पहचान माने जाते हैं। वह अपनी सादगी, ईमानदारी और वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दिखाए गए मजबूत नेतृत्व के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध थे। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही भारत ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार जीत हासिल की थी।

इसके अलावा, अपने जीवन के शुरुआती दौर में जब वह देश के रेल मंत्री थे, तब एक बड़ी रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जो उनके उच्च नैतिक मूल्यों को दर्शाता है। उनके कार्यकाल के दौरान ही देश में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की शुरुआत हुई, जिससे देश में कृषि और डेयरी विकास को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला। आज इन दोनों महान विभूतियों की जयंती पर पूरा देश उनके कृत्यों और बलिदानों को कृतज्ञता के साथ याद कर रहा है।