फ्लाईदुबई का एक विमान आसमान में उड़ रहा है, जिसे फ्लाईदुबई घटना के बाद भारत सरकार द्वारा कॉकपिट सुरक्षा समीक्षा के संदर्भ में देखा जा रहा है।

फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाईजैक करने की कोशिश के मामले के बाद भारत सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। इस घटना के बाद देश के तमाम एयरपोर्ट्स का सिक्योरिटी रिव्यू किया जा रहा है और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर हवाई जहाजों की कॉकपिट सिक्योरिटी को लेकर गंभीर चिंतन शुरू हो गया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

सूत्रों के अनुसार, नागर विमानन मंत्रालय, बीसीएएस, डीजीसीए, सीआईएसएफ, आईबी और अन्य एजेंसियों ने मिलकर काम करना शुरू कर दिया है ताकि सुरक्षा में किसी भी कमी को दूर किया जा सके। सरकार फ्लाईदुबई की घटना की चल रही जांच को ऑब्जर्व कर रही है और मंत्रालय तथा संबंधित एजेंसियां भारतीय एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के संपर्क में हैं ताकि कोई खतरा उत्पन्न न हो।

घटना के बाद कॉकपिट के अंदर से ही एक बड़ी चुनौती सामने आई है, जिसके चलते आने वाले समय में कॉकपिट की सुरक्षा के लिए एक नई एसओपी (SOP) जारी हो सकती है। भारत से इजरायल के लिए वर्तमान में केवल एयर इंडिया की फ्लाइट जाती है, जो मिडिल ईस्ट संकट की वजह से सस्पेंड चल रही थी और अब 1 दिसंबर से दिल्ली से तेल अवीव रूट पर इसके फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इस रूट की फ्लाइट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें एयर मार्शल की तैनाती की जा सकती है।

इसके अलावा, सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए कई अन्य उपायों पर भी विचार किया जा रहा है:

  • हवाई जहाज में बैठने से पहले यात्रियों, विशेष तौर पर पायलटों और एयर होस्टेस की दोबारा चेकिंग शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
  • कॉकपिट से लेकर पूरे हवाई जहाज की गहन जांच की बात सोची जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसमें कोई चाकू, शार्प ऑब्जेक्ट या बंदूक जैसी कोई चीज न छिपाई गई हो।
  • पायलटों और क्रू सदस्यों का साइको टेस्ट (मनोवैज्ञानिक परीक्षण) कराने पर भी विचार किया जा रहा है।
  • ड्यूटी के दौरान ऐसे पायलटों को एक-दूसरे के साथ नहीं लगाने पर विचार किया जा सकता है जिनकी आपस में किसी बात पर तनातनी चल रही हो।

फ्लाईदुबई मामले ने पूरी दुनिया का ध्यान कॉकपिट के भीतर से पैदा होने वाले खतरे की ओर खींचा है। भारत सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि यदि कोई क्रू मेंबर ही विमान को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करे, तो अंतिम सुरक्षा घेरा क्या होना चाहिए। इसी वजह से अतिरिक्त जांच, मनोवैज्ञानिक परीक्षण और कॉकपिट की तलाशी जैसे कड़े उपाय अमल में लाए जा सकते हैं।