विश्व आदिवासी दिवस पर इंदिरा मीणा का संदेश, तीर-कमान से जल-जंगल-जमीन बचाने का आह्वान
विश्व आदिवासी दिवस पर बामनवास विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंदिरा मीणा ने चौथ का बरवाड़ा, अजनौटी मीणा हाईकोर्ट और बोली में कार्यक्रमों में भाग लिया। पौधरोपण, तीर-कमान और बालिका शिक्षा पर दिया संदेश।
तस्वीर में विधायक इंदिरा मीणा सवाई माधोपुर में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस समारोह के मंच पर हाथ जोड़े हुए नजर आ रही हैं, जिनके आसपास स्थानीय लोग और ग्रामीण मौजूद हैं।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बामनवास विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंदिरा मीणा ने सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा, अजनौटी मीणा हाईकोर्ट और बोली में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पौधरोपण और पारंपरिक रूप से तीर-कमान चलाकर आदिवासी संस्कृति के साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रमों में बालिकाओं की शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया।
चौथ का बरवाड़ा स्थित मीणा धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बामनवास विधायक एवं जिलाध्यक्ष इंदिरा मीणा का स्थानीय कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों ने भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक बैरवा, चौथ का बरवाड़ा प्रधान संपत पहाड़िया, जिला उपाध्यक्ष बसंती लाल सैनी, आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश मीणा, चौथ का बरवाड़ा ब्लॉक अध्यक्ष विमल मीना, डिडाईच सरपंच एवं पूर्व NSUI जिलाध्यक्ष पवन बड़गोत्या, पंचायती राज संगठन जिलाध्यक्ष रामभजन, जमनालाल मीना, दशरथ मीणा एवं हरगोविंद सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
कांग्रेस मीडिया प्रभारी अमन खान ने जानकारी देते हुए बताया कि इसी क्रम में अजनौटी मीणा हाईकोर्ट एवं बोली में आयोजित कार्यक्रमों में भी विधायक इंदिरा मीणा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ बामनवास ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम मीणा, पूर्व NSUI जिलाध्यक्ष पवन बड़गोत्या, धर्मेंद्र गुर्जर एवं शाहरुख सेलू भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए विधायक इंदिरा मीणा ने बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज और देश के सर्वांगीण विकास के लिए बच्चियों को शिक्षित करना बेहद आवश्यक है।
विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इंदिरा मीणा ने मीणा धर्मशाला और मीन भगवान मंदिर परिसर में पौधरोपण किया। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक रूप से तीर-कमान चलाकर आदिवासी संस्कृति और जल, जंगल एवं जमीन के रक्षक होने का संदेश दिया। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का आह्वान किया। कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और बालिका शिक्षा के महत्व का संदेश प्रमुखता से सामने आया।