सवाई माधोपुर: जिला परिषद में विधिक सेवा जागरूकता शिविर आयोजित
शिविर में आमजन को निःशुल्क कानूनी सहायता, हिट एंड रन मुआवजा और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों की जानकारी दी गई।
सवाई माधोपुर जिला परिषद सभागार में विधिक जागरूकता शिविर के दौरान मौजूद अधिकारी और कार्मिक।
सवाई माधोपुर में आमजन और कर्मचारियों को विधिक अधिकारों, निःशुल्क कानूनी सहायता तथा विभिन्न विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी देने के लिए जिला परिषद सभागार में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार बुधवार, 14 अक्टूबर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में स्थाई लोक अदालत की कार्यप्रणाली, हिट एंड रन दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे, एसिड हमले के पीड़ितों की सहायता और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कानूनी अधिकारों पर जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर की सचिव समीक्षा गौतम ने स्थाई लोक अदालत की कार्यप्रणाली और कार्यक्षेत्र के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्थाई लोक अदालत जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के सरल और सुलभ समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम है। जल, विद्युत, शैक्षणिक संस्थाओं, अस्पतालों, बैंक एवं वित्तीय सेवाओं, डाक, तार, टेलीफोन और परिवहन सेवाओं से संबंधित विवादों का निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निस्तारण किया जा सकता है।
शिविर में हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा योजना, 2022 की जानकारी भी दी गई। सचिव समीक्षा गौतम ने बताया कि इस योजना के तहत उन दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा प्रदान किया जाता है, जिनकी दुर्घटना ऐसे वाहन से होती है, जिसकी पहचान नहीं हो पाती है। सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर पीड़ित के आश्रित को 2 लाख रुपये और घायल होने पर 50 हजार रुपये का मुआवजा देय है।
एसिड हमले के पीड़ितों के अधिकारों पर चर्चा करते हुए नालसा (एसिड हमले के पीड़ितों के लिए विधिक सेवाएं) योजना के उद्देश्य और इसके तहत मिलने वाली सहायता के बारे में बताया गया। इसमें निःशुल्क विधिक सहायता, मुआवजा, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों के साथ पात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
इसके अलावा नालसा (असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2015 के बारे में भी जागरूक किया गया। सचिव समीक्षा गौतम ने बताया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को उनके विधिक अधिकारों, उपलब्ध सरकारी योजनाओं और निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी देना आवश्यक है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे संबंधित विधिक सेवा संस्थाओं से सहायता प्राप्त कर सकें।
स्थाई लोक अदालत की सदस्य जूली खंडेलवाल ने भी अदालत की कार्यप्रणाली और उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्रदान की। शिविर में जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारीगण, पैनल अधिवक्ता अभय कुमार गुप्ता और नंदकिशोर बैरवा आदि उपस्थित रहे।
इस दौरान अधिकार मित्र मुकेश कुमार शर्मा, बुनियाद अली, धनराज मीना और गिर्राज रैगर ने कैनोपी लगाकर आमजन को विभिन्न विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी दी। शिविर का उद्देश्य आमजन और कार्मिकों को कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा सरकारी विधिक सेवा योजनाओं के प्रति जागरूक करना रहा, ताकि पात्र व्यक्तियों तक न्याय और कानूनी सहायता की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।