सवाई माधोपुर में न्यायिक अधिकारियों की कार्यशाला, लैंगिक समानता और साइबर अपराधों पर हुआ मंथन
सवाई माधोपुर में राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी की प्रथम त्रैमासिक कार्यशाला आयोजित हुई। न्यायिक अधिकारियों ने लैंगिक समानता, पोश अधिनियम 2013, साइबर अपराध और धन वापसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
तस्वीर में सवाई माधोपुर में आयोजित प्रथम त्रैमासिक कार्यशाला के दौरान मंच पर माननीय न्यायाधिपति श्रीमान इन्द्रजीत सिंह और अन्य न्यायिक अधिकारी नजर आ रहे हैं।
राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी जोधपुर के तत्वावधान में माननीय न्यायाधिपति श्रीमान इन्द्रजीत सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय की अध्यक्षता में प्रथम त्रैमासिक कार्यशाला का आयोजन 26.07.2026 को जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर में किया गया। कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों ने लैंगिक समानता, कार्यस्थल सुरक्षा, साइबर अपराध और धन संबंधी डिक्री के निष्पादन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यशाला में श्रीमान देवेन्द्र दीक्षित जिला एवं सेशन न्यायाधीश सवाई माधोपुर, श्रीमान केशव कौशिक जिला एवं सेशन न्यायाधीश दौसा, डाॅ. सीमा अग्रवाल जिला एवं सेशन न्यायाधीश टोंक सहित सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक के समस्त न्यायिक अधिकारीगण ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में लैंगिक समानता और कार्यस्थल पर सुरक्षा, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव एवं उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। पोश अधिनियम 2013 के प्रावधानों और प्रक्रियाओं पर सुश्री ऋतु चंदानी अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 01 लालसोट ने अपने विचार रखे। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के तहत कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार और गरिमा विषय पर भी प्रकाश डाला।
श्रीमती मधु शर्मा अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 2 लालसोट ने न्यायिक और प्रशासनिक कार्यवाही में लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं श्रीमती माध्वी गोस्वामी अति. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 2 दौसा ने महिलाओं के खिलाफ दहेज संबंधी अपराधों के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आधारों पर विस्तृत वाचन किया तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों का उल्लेख किया।
कार्यशाला के द्वितीय विषय के रूप में डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों में धन की वापसी, NCRP-CFCFRMS पर मानक परिचालन प्रक्रिया, ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों एवं ऑनलाइन फ्रॉड के जरिये प्राप्त राशि से संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने तथा धन वापसी से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
इस सत्र में टोंक न्यायक्षेत्र के न्यायिक अधिकारी श्रीमती अशिमा माथुर, श्रीमती सबा परवीन कागजी, श्री गजपाल सिंह तथा श्रीमती साधना सिंह ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने माननीय उच्चतम न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालयों के विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए उनमें प्रतिपादित सिद्धांतों से कार्यशाला में उपस्थित न्यायिक अधिकारीगण को अवगत कराया।
श्रीमान देवेन्द्र दीक्षित जिला एवं सेशन न्यायाधीश सवाई माधोपुर ने वर्तमान में बढ़ रहे साइबर अपराधों से बचने के लिए विशेष रूप से जागरूक रहने के सुझाव दिए।
कार्यशाला के अंतिम चरण में धन संबंधी डिक्री के निष्पादन और उससे जुड़ी अन्य संबंधित कार्यवाहियों पर श्री विकास नेहरा अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश बौंली एवं श्री भरत पुनिया अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 1 गंगापुर सिटी ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। माननीय न्यायाधिपति महोदय ने न्यायिक अधिकारीगण द्वारा उक्त विषयों पर प्रस्तुत शंकाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रेशमा खान अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या 2 गंगापुर सिटी एवं डा. प्रियंका पारीक अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सवाई माधोपुर द्वारा किया गया। श्री मयंक पालीवाल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सवाई माधोपुर ने माननीय न्यायाधिपति महोदय, सभी माननीय जिला न्यायाधीशगण तथा उपस्थित न्यायिक अधिकारीगण का धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यशाला को सफल बनाने में विशेष सहयोग प्रदान किया।
कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों को बदलते सामाजिक, तकनीकी और न्यायिक परिदृश्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्रदान की गई, जिससे न्यायिक कार्यवाही में संवेदनशीलता और प्रभावशीलता को मजबूत करने पर जोर दिया गया।