गीता भवन कोटा में जोन स्तरीय संत निरंकारी महिला समागम सम्पन्न, गंगापुर सिटी की साध संगत ने भजनों से बांधा समां

गीता भवन कोटा में आयोजित जोन स्तरीय संत निरंकारी महिला समागम में डॉ. प्रवीण खुल्लर ने नारी सम्मान, समर्पण, ब्रह्मज्ञान और गुरुमत पर आधारित जीवन का संदेश दिया।

Update: 2026-07-27 14:22 GMT

तस्वीर में मंच पर बैठीं आदरणीय बहन डॉ. प्रवीण खुल्लर जी (सफेद पोशाक में) हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार कर रही हैं, जबकि हरे रंग की साड़ी पहनी महिला श्रद्धालु उनके समक्ष नतमस्तक हैं।

संत निरंकारी मंडल के तत्वावधान में गीता भवन, कोटा में जोन स्तरीय संत निरंकारी महिला समागम का आयोजन दिल्ली से पधारी मेंबर इंचार्ज, प्रचार-प्रसार, संत निरंकारी मंडल आदरणीय बहन डॉ. प्रवीण खुल्लर जी के सानिध्य में आयोजित हुआ। समागम में गंगापुर सिटी की साध संगत ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।

महिला समागम में महिलाओं ने हिन्दी, इंग्लिश, राजस्थानी, पंजाबी, सिंधी सहित अनेक भाषाओं में सुंदर कविता, गीत और विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ हरदेव बाणी के सुंदर गायन से हुआ। जोन स्तरीय निरंकारी महिला समागम में हजारों की संख्या में पधारी माता-बहनों ने गुरुमत पर आधारित गीत, कविता और विचार प्रस्तुत किए। समागम के दौरान कवि दरबार का भी आयोजन हुआ, जिसमें बहनों ने कविता के माध्यम से अनेक विषयों पर अपने भाव व्यक्त किए।

श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए दिल्ली से पधारी आदरणीय बहन डॉ. प्रवीण खुल्लर जी ने कहा कि जो सतगुरु के विचारों पर चलते हैं, उनके जीवन में हमेशा खुशियां रहती हैं। जिन घरों में नारी का सम्मान होता है, वहां ईश्वर निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने स्थिरता का पाठ पढ़ाया है और स्थिरता तब तक संभव नहीं, जब तक व्यक्ति स्वयं को समर्पित नहीं कर देता। उन्होंने कहा कि महात्मा कहते हैं, "जरा पास आकर देखा, यह नजारे दूर से ना देखो, नजदीक आ जाओ, क्योंकि अगर दूरी रह गई तो मैं और तू दो अलग पहचान हैं, तब तक दूरी बनी रहती है। इसमें समर्पण सबसे पहले जरूरी है।"

डॉ. प्रवीण खुल्लर जी ने कहा कि नारी रोटी बनाने के साथ रोटी कमाने का भी हुनर रखती है। नारी से ही जीवन की शुरुआत है और नारी ही जग जननी है। जो मातृशक्ति का सम्मान करता है, वह हमेशा प्रोग्रेस करता है। जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वह घर स्वर्ग समान होता है। उन्होंने कहा कि नारी ही नारायणी, लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती का रूप है। सतगुरु ने ब्रह्मज्ञान देकर हमें यह समझ दी है कि हमारी वजह से कोई दुखी न हो और सबके जीवन में खुशियां हों।

उन्होंने आगे कहा कि संस्कारवान महिला दो परिवारों को संवारती है। शादी से पहले वह अपने घर को संवारती है और शादी के बाद अपने ससुराल की सभी जिम्मेदारियां निभाते हुए खुशियों भरा वातावरण बनाती है। समय के सतगुरु सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की सिखलाई यही है कि गृहस्थ के सभी कार्य भी करने हैं और ईश्वर की भक्ति भी करनी है। उन्होंने कहा कि नारी में समर्पण भाव होता है, जो उसे महान बनाता है। अनेक जिम्मेदारियां निभाने के बाद भी महिला सहनशीलता से घर-परिवार में सुंदर वातावरण बनाए रखती है। यदि जीवन में आपसी तालमेल नहीं है तो यह विचार करना चाहिए कि क्या हम परिवार को बनाकर चल रहे हैं या परिवार में कलह का कारण बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन की यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं, जिससे विकारों का आना स्वाभाविक है, फिर भी सतगुरु की सिखलाई को जीवन में आगे रखकर नारी कर्म करती है तो पूरे परिवार में खुशियों भरा वातावरण बनाए रखती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि "ज्ञान कर्म में ढल जाये तो जीवन का श्रृंगार बने।" उन्होंने कहा कि जब इंसान गुरुमत को जीवन में अपनाता है तो स्वर्ग का नक्शा बन जाता है। ब्रह्मज्ञानी बहन अपने बच्चों को बचपन से ही आध्यात्मिक राह पर चलाती है, ताकि वे बड़े होकर अच्छे इंसान बनें और परिवार तथा राष्ट्र का नाम रोशन करें।

डॉ. प्रवीण खुल्लर जी ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य धन-दौलत इकट्ठा करना नहीं, बल्कि इंसानियत युक्त जीवन जीते हुए प्रभु भक्ति करना है। उन्होंने कहा, "सुत धारा और लक्ष्मी पापी के भी होए, सन्त समागम हरि कथा तुलसी दुर्लभ दोई।" उनके अनुसार धन-दौलत सही या गलत तरीके से कमाई जा सकती है, लेकिन मानवीय गुण केवल सत्संग से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में पहली प्राथमिकता समय के सतगुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर ईश्वर की भक्ति करना है। महिला समागम का उद्देश्य भी यही है कि प्रत्येक व्यक्ति परमात्मा की भक्ति को समय दे सके। उन्होंने कहा कि एक नूर सबके अंदर है, चाहे नर हो या नारी, इसलिए अंग-संग बसे इस निरंकार को जीवन रहते जानना और पहचानना आवश्यक है। समय समाप्त होने के बाद भक्ति संभव नहीं है। यदि हर समय निरंकार का एहसास बना रहे तो जीवन अत्यंत सुंदर हो जाता है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा का लाख बार शुक्रिया अदा करें, फिर भी कम है, क्योंकि उसकी कृपा से मानव जीवन मिला और इसी जीवन में परमात्मा के दीदार हुए। सतगुरु ने वसुधैव कुटुंबकम की भावना देकर सभी को अपना बना दिया है, अब कोई बेगाना नहीं है। उन्होंने कहा कि मन, वचन और कर्म से ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए, जिससे किसी का दिल दुखे। उन्होंने कहा कि जब ज्ञान का सूरज उदय होता है तो आत्मा प्रकाशित हो जाती है। जो शरीर, रिश्ते, महल, गाड़ियां और यह संसार दिखाई देता है, वह सब नश्वर है। पवन और पानी को भी एक दिन चले जाना है, अटल और अविनाशी केवल प्रभु निरंकार है।

कार्यक्रम के अंत में कोटा-भीलवाड़ा जोन के जोनल इंचार्ज संत श्री बृजराज सिंह यादव जी ने आभार व्यक्त करते हुए साध संगत का हार्दिक अभिनंदन किया तथा सत्संग से जुड़कर जीवन को सुंदर बनाने की प्रेरणा दी। गंगापुर सिटी की मुखी पुष्पा देवी जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन गंगापुर सिटी की सोनिया पेशवानी जी ने किया। सत्संग कार्यक्रम में आर्मी, रेलवे तथा प्रशासनिक अधिकारियों सहित गणमान्य सज्जनों ने उपस्थित रहकर सत्संग का लाभ उठाया।

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