तस्वीर में गंगापुर सिटी में आयोजित राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के शैक्षिक सम्मेलन के दौरान मंचासीन अतिथि और पदाधिकारी नजर आ रहे हैं।   

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन के द्वितीय दिवस का कार्यक्रम सैनी मैरिज होम, गंगापुर सिटी में संपन्न हुआ। सम्मेलन के समापन समारोह में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण, छह सत्रों से बकाया विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी), पारदर्शी स्थानांतरण नीति और शिक्षकों को गैर-शैक्षिक कार्यों से मुक्त रखने सहित विभिन्न मांगें मुख्य मुद्दे के रूप में उठाई गईं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा मां शारदे की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि देवी लाल मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा, सवाईमाधोपुर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में संगठन के प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीना तथा अतिथि के रूप में विजय सिंह गुर्जर और रामलाल वैष्णव मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के सभा अध्यक्ष एवं अतिरिक्त महामंत्री सोहनलाल गुप्ता ने की। संगठन की ओर से मंचासीन अतिथियों का माला और साफा पहनाकर तथा स्मृति चिन्ह देकर स्वागत, वंदन और अभिनंदन किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी देवीलाल मीना ने वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं के लिए नैतिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जायज मांगों को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम हर समय आगे रहता है। उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों द्वारा विद्यालयों में किए जा रहे अच्छे कार्यों की प्रशंसा भी की।

संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी महेश जैन ने संगठन को मजबूत और सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक तक संगठन की गतिविधियां पहुंचाने और अधिक से अधिक सदस्यता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शिक्षकों से निडर होकर संगठन के साथ रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी शिक्षक को अधिकारी या राजनेता अनावश्यक रूप से परेशान करता है तो इसकी जानकारी संगठन को दी जाए। साथ ही उन्होंने शिक्षकों से अपनी संस्था की हर गतिविधि में सहयोग करने का सुझाव दिया।

जिला अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। अतिरिक्त महामंत्री सोहनलाल गुप्ता ने संगठन की कार्यपद्धति और संगठन हित में कार्य करने पर जोर देते हुए शिक्षकों की समस्याओं के लिए हर समय तैयार रहने की बात कही।

प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीना ने कहा कि सरकार कोई भी हो, राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम मजबूत संख्या बल के आधार पर पूरे प्रदेश में चट्टान की तरह खड़ा रहता है और शिक्षक, शिक्षा एवं शिक्षार्थियों के विरोध में निर्णय लेने वाली सरकारों का दुगुनी ताकत से मुकाबला करते हुए हमेशा खड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि चाहे ग्रीष्मकालीन अवकाश कटौती का मुद्दा हो, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण का मामला हो, पारदर्शी शिक्षा नीति का विषय हो अथवा तृतीय श्रेणी शिक्षकों की छह सत्रों की बकाया डीपीसी का मामला, संगठन इनमें से किसी भी मुद्दे पर चुप रहने वाले संगठनों में से नहीं है।

रामदयाल मीना ने कहा कि प्रदेश स्तर पर परम सम्माननीय, जुझारू एवं संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी सियाराम जी शर्मा भाई साहब के नेतृत्व में प्रदेश कार्यकारिणी ने राज्य सरकार के निरंकुश एवं तानाशाहीपूर्ण रवैये पर नकेल कस रखी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विगत समय में जिस प्रकार मनमानी तरीके से ईमानदार शिक्षक साथियों को भी अपनी हठधर्मिता के कारण दंडित किया है, ऐसी सरकार को आगामी समय में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि इस सरकार एवं माननीय मंत्रियों के कारनामों को जनता देख रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिखाई देने की बात कही।

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने राज्य सरकार एवं शिक्षा मंत्री से मांग की कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण तत्काल शुरू किए जाएं तथा तृतीय श्रेणी शिक्षकों की छह सत्रों से बकाया डीपीसी तुरंत प्रभाव से कराई जाए। संगठन ने स्पष्ट एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति को उत्तर प्रदेश मॉडल की तरह लागू करने, शिक्षकों को शैक्षिक कार्य के अलावा किसी भी गैर-शैक्षिक कार्य में नहीं लगाने तथा पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी एवं यूसीईओ के अतिरिक्त कार्यभार को देखते हुए 10 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन देने की मांग भी रखी।

सम्मेलन में वजीरपुर, बामनवास, गंगापुर सिटी, मलारना डूंगर, बौंली, स मा, खंडार सहित सभी उपशाखाओं से आए सैकड़ों शिक्षक साथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन सोहनलाल गुप्ता ने किया। अंत में स्वल्पाहार के बाद कार्यक्रम संयोजक हनुमान प्रसाद शर्मा ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

कार्यक्रम में नरेश सिसोदिया, हनुमान प्रसाद शर्मा, मोहिद खान, फिरोज खान, पवन शर्मा, महेश जैन, देवेंद्र शर्मा, सत्य प्रकाश गर्ग, सुरेश चंद्र गर्ग, रघुवीर जाटव और सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे। सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण और छह सत्रों से लंबित डीपीसी की मांग प्रमुख रही।

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