तस्वीर में करौली जिला जेल के अंदर मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधिकारी और जमीन पर बैठे हुए बंदी नजर आ रहे हैं।

करौली जिला जेल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह के तहत स्टाफ और निरुद्ध बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पांच मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित ‘राज ममता एवं मन दर्पण’ कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रशिक्षण में तनाव प्रबंधन, अवसाद, एंग्जायटी, मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम से संबंधित जानकारी दी गई।

जिला जेल प्रभारी उपाधीक्षक रामकिशन ने बताया कि जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई के सहयोग से जेल स्टाफ को कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन और बंदियों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान बंदियों को ‘युवा मन एवं मानसिक स्वास्थ्य’, ‘आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स’, ‘तनाव प्रबंधन’, ‘कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य’ तथा आत्महत्या रोकथाम के लिए ‘गेटकीपर’ मॉड्यूल की जानकारी दी गई।

मानसिक स्वास्थ्य प्रभारी डॉ. प्रेमराज मीना ने कहा कि बंदियों में अपराध की पुनरावृत्ति कम करने तथा स्वस्थ एवं तनावमुक्त जीवन को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक सोच, आपसी विश्वास और सहयोग की भावना विकसित करना जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान मानसिक तनाव के संकेतों की पहचान, भावनात्मक सहयोग और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता लेने के लिए भी जागरूक किया गया।

सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह मनाया जा रहा है। इसके तहत जिले के विभिन्न संस्थानों में मन दर्पण के पांच मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में सीआरए गौरव शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं नशामुक्ति की शपथ दिलाई। इस दौरान वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी अंकुर पाराशर, जेल स्टाफ एवं निरुद्ध बंदी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से मानसिक तनाव के संकेतों की पहचान, भावनात्मक सहयोग और समय पर सहायता लेने से जुड़े पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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