स्वाध्याय से आत्मा का शुद्धिकरण, ज्ञान के बिना साधना अधूरी : उपासक पारसमल दुगड़
आदर्श नगर के तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन स्वाध्याय दिवस मनाया गया। उपासक पारसमल दुगड़ ने स्वाध्याय को आत्मशुद्धि का माध्यम बताते हुए जैन धर्म में इसके 5 प्रकार समझाए।
तस्वीर में आदर्श नगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ध्यान मुद्रा में बैठे उपासक पारसमल दुगड़ (बाएं) और माइक के पास पाठ करते हुए रमेश कुमार सिंघवी (दाएं) नजर आ रहे हैं।
तेरापंथ भवन आदर्श नगर में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन स्वाध्याय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक एवं प्रवक्ता उपासक पारसमल दुगड़ ने कहा कि स्वाध्याय के माध्यम से आत्मा से साक्षात्कार संभव है। उन्होंने कहा कि जीवन को उन्नत बनाने और स्वयं को जानने के लिए किया गया अध्ययन स्वाध्याय कहलाता है। सबसे बड़ा तप यदि कोई है तो वह स्वाध्याय है। उपवास शरीर को शुद्ध करता है, जबकि स्वाध्याय आत्मा को शुद्ध करता है।
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा आदर्श नगर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उपासक पारसमल दुगड़ एवं सहयोगी उपासक रमेश कुमार सिंघवी मुंबई ने कहा कि आज हमारे पास मोबाइल देखने के लिए 4 घंटे हैं, लेकिन शास्त्र पढ़ने के लिए 10 मिनट नहीं हैं। बिना ज्ञान के क्रिया अधूरी है। हम साधना तो करते हैं, लेकिन क्यों करते हैं, यह पता नहीं होता। स्वाध्याय हमें बताता है कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। ज्ञान के बिना चारित्र और चारित्र के बिना मुक्ति संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि जैन धर्म में स्वाध्याय के 5 प्रकार बताए गए हैं। इनमें वाचना यानी पढ़ना, पृच्छना यानी पूछना और शंका समाधान, अनुप्रेक्षा यानी चिंतन-मनन करना, आम्नाय यानी बार-बार याद करना तथा धर्मकथा यानी दूसरों को सुनाना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में रखी पुस्तक किसी को ज्ञानी नहीं बनाती, बल्कि पढ़ी हुई पुस्तक ही ज्ञानी बनाती है। जो प्रतिदिन स्वाध्याय करता है, उसके जीवन में कभी अंधकार नहीं आता।
स्वाध्याय दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत उपासक द्वय द्वारा प्रस्तुत नमस्कार महामंत्र से हुई। इसके बाद महिला मण्डल की बहनों ने मंगलाचरण की स्तुति प्रस्तुत की।
पूरे दिन चलने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त प्रातः 6 से 7 बजे तक आयोजित सत्र में वरिष्ठ उपासक पारसमल दुगड़ ने सायटिका बीमारी के उपचार के लिए प्रायोगिक प्रयोगों की अनुभूत प्रस्तुति दी। रात्रिकालीन सत्र में भगवान महावीर एवं गौत्तम संवाद के माध्यम से आगमिक ज्ञान की तात्विक प्रस्तुति दी गई। पर्युषण महापर्व के स्वाध्याय दिवस पर हुए इन कार्यक्रमों में स्वाध्याय, ज्ञान और साधना के महत्व को केंद्र में रखा गया।