करौली मेडिकल कॉलेज: एमबीबीएस छात्रों के लिए तनाव और समय प्रबंधन कार्यशाला
नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइडलाइंस के तहत करौली मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस नए छात्रों के लिए तनाव और समय प्रबंधन पर विशेष फाउंडेशन क्लास का आयोजन किया गया।
करौली मेडिकल कॉलेज में फाउंडेशन क्लास के दौरान मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्त रहने की शपथ लेते नए एमबीबीएस छात्र।
करौली। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के बाद पढ़ाई का बढ़ता दबाव, विशाल पाठ्यक्रम और नए माहौल में ढलने की चुनौती छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए करौली मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के नए बैच के विद्यार्थियों के लिए तनाव एवं समय प्रबंधन पर विशेष फाउंडेशन क्लास आयोजित की गई। नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइडलाइंस के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और पढ़ाई के दबाव से निपटने के तरीके सिखाना था, ताकि वे डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्याओं से बच सकें।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर. सी. मीना ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि नीट जैसी कठिन परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विशाल सिलेबस, कड़ा एकेडमिक शेड्यूल और घर से दूर रहने के कारण वे तनावग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में शुरुआती दौर में ही तनाव के लक्षणों को पहचानना और समय पर मदद लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी छात्र को मन में उदासी या घबराहट महसूस होने पर कॉलेज के मेंटर्स, फैकल्टी और मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार से बिना संकोच संपर्क करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों की सेवा मानवीय दृष्टिकोण से करने की सलाह भी दी।
कार्यक्रम में मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेमराज मीना ने मानसिक तनाव के कारणों और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नीट की तैयारी, मेडिकल में प्रवेश, नए वातावरण में ढलने और परिजनों से दूर रहने जैसे कारणों से विद्यार्थियों में मानसिक तनाव, अकेलापन, घबराहट, नींद न आने, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं की समय रहते पहचान और बचाव के लिए तनाव एवं समय प्रबंधन बेहद जरूरी है।
डॉ. प्रेमराज मीना ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान पर्याप्त नींद लेने और बड़े सिलेबस तथा प्रोजेक्ट्स को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर समयबद्ध शेड्यूल तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस तरह योजना बनाकर पढ़ाई करने से परीक्षा के समय दबाव से बचने में मदद मिल सकती है। उन्होंने छात्रों को प्रतिदिन 15 से 20 मिनट योग, ध्यान या वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए भी प्रेरित किया।
उन्होंने तनाव दूर करने के लिए किसी भी तरह के नशे या गलत आदतों का सहारा नहीं लेने की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी आदतों के गंभीर शारीरिक और मानसिक दुष्परिणाम हो सकते हैं। विद्यार्थियों को तनाव से निपटने के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के महत्व से भी अवगत कराया गया।
कार्यशाला में डॉ. रचना शर्मा और डॉ. अंकुर बिछबलिया के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। छात्रों ने तनाव प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं और अपने करियर को लेकर मन में उठ रही शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान जीवन में मानसिक रूप से स्वस्थ और नशामुक्त रहने के लिए विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य की शपथ भी दिलाई गई। इस पहल के माध्यम से नए मेडिकल विद्यार्थियों को पढ़ाई के दबाव का सामना करने, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।